अररिया। नजरिया न्यूज ब्यूरो।
अररिया मंडल कारागार में बंद एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से जेल प्रशासन कटघरे में आ गया है। मृतक की पहचान पश्चिम बंगाल के मालदह जिला निवासी शिबू घोष के रूप में हुई है, जो शराब तस्करी के मामले में जेल की सजा काट रहा था। वह पिछले 4 साल 10 महीने से जेल में था और उसकी रिहाई में अब मात्र 2 महीने ही बाकी थे। मगर इसी बीच उसकी संदिग्ध स्थिति में मौत ने जेल के भीतर की सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिबू घोष को गुरुवार सुबह मृत अवस्था में अररिया सदर अस्पताल लाया गया था। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर डॉ. नंदकिशोर ने स्पष्ट रूप से कहा कि कैदी की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। खास बात यह है कि मृतक के शरीर पर खून के कई निशान पाए गए, जिससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि मौत सामान्य नहीं, बल्कि किसी हिंसक घटना का परिणाम हो सकती है।
इस घटना ने जेल प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान लगा दिया है। जेल अधीक्षक सुजीत कुमार झा से जब इस विषय में प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कैमरे पर कोई बयान देने से इनकार कर दिया। उन्होंने मात्र इतना कहा कि “कैदी पूर्व से ही बीमार था”। लेकिन परिवार और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह सिर्फ लीपा-पोती है और प्रशासन कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा है।
मृतक के भाई इंद्र घोष ने बताया कि शिबू पूर्णतः स्वस्थ था और जल्द रिहाई की तैयारी कर रहा था। उन्होंने आशंका जताई कि किसी ने जानबूझकर उसकी हत्या की है। उन्होंने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं अररिया के सामाजिक कार्यकर्ता आशीष रंजन ने भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “जेल के भीतर कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। एक के बाद एक इस तरह की घटनाएं यह बताती हैं कि जेल में बहुत कुछ गलत हो रहा है।”
गौरतलब है कि इस घटना के ठीक एक दिन पहले ही जेल में एक अन्य बंदी ने आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसे समय रहते बचा लिया गया। लगातार हो रही इन घटनाओं से यह साफ जाहिर है कि जेल के अंदर हालात सामान्य नहीं हैं।
परिजन और समाज के जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाई जाए। साथ ही जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएं।
यह घटना न केवल एक बंदी की संदिग्ध मौत है, बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक विफलता का संकेत भी है, जिसे अनदेखा करना भविष्य में और बड़ी घटनाओं को न्योता दे सकता है।






















