नजरिया न्यूज़, अररिया।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम पर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विजेंद्र यादव ने सवाल खड़े किए हैं। एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने केंद्र और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड को सरकार ने बैंक, मोबाइल और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने को अनिवार्य कर दिया है, लेकिन जब बात मतदाता पहचान की आती है तो वही आधार और राशन कार्ड पर्याप्त नहीं माने जाते।
जिलाध्यक्ष यादव ने तंज कसते हुए कहा, “अगर आधार कार्ड और राशन कार्ड को नागरिक पहचान के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा, तो यह व्यवस्था कैसे चलेगी? क्या अब तक जो करोड़ों लोग वोट देते आ रहे हैं, वे पाकिस्तान या किसी और देश के निवासी थे?” उन्होंने इसे आम जनता के साथ अन्याय बताया और कहा कि एक ओर सरकार नागरिकों को डिजिटल पहचान के लिए मजबूर करती है, दूसरी ओर उसी पहचान को मान्यता नहीं देती।
उन्होंने आगे कहा कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और पर्ची प्राप्त करने की प्रक्रिया भी काफी जटिल और त्रुटिपूर्ण है। “कम से कम 20 प्रतिशत लोगों को पर्ची तक नहीं मिल पाती और वे मतदान केंद्रों पर भटकते रहते हैं। यह लोकतंत्र का अपमान है,” यादव ने कहा।
कांग्रेस नेता ने इस पूरी प्रक्रिया को भ्रामक और जनता के लिए परेशानी वाला करार दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता पुनरीक्षण के नाम पर जनता को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। “देश के नागरिकों से ही नागरिकता का प्रमाण मांगना न केवल अपमानजनक है बल्कि यह प्रशासन की असफलता को दर्शाता है,” उन्होंने कहा।
प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह मतदाता पहचान के लिए आधार और राशन कार्ड जैसे मान्यता प्राप्त दस्तावेजों को पर्याप्त माने और प्रक्रिया को सरल बनाए, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता लाई जाए और स्थानीय स्तर पर शिकायत निवारण की व्यवस्था मजबूत की जाए।
जिलाध्यक्ष के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चुनावी तैयारियों और पारदर्शिता को लेकर बहस फिर से तेज हो गई है।






















