गरीबी का समाधान करने के लिए पेशेवर तरीके अपनाए जाने चाहिए:ग्रामीण विकास मंत्रालय के अपर सचिव टी. के. अनिल कुमार
प्रतिभा सिंह, नजरिया न्यूज संवाददाता नई दिल्ली, 24जून।
लखपति दीदी और अन्य जमीनी स्तर के उद्यमियों के नेतृत्व में ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) ने आज नई दिल्ली में विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया। परामर्श में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।सत्र का उद्घाटन करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय के अपर सचिव टी. के. अनिल कुमार ने डीएवाई-एनआरएलएम की सराहना करते हुए कहा कि गरीबी का समाधान करने के लिए गलत तरीके नहीं, बल्कि पेशेवर तरीके अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मिशन के विजन में न केवल महिलाओं बल्कि युवा किसानों और ग्रामीण युवाओं को भी शामिल करके उद्यमशीलता के परिदृश्य को व्यापक बनाने की आवश्यकता है।
कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की संयुक्त सचिव (उद्यमिता) सुश्री हेना उस्मान ने स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को विस्तृत जानकारी और सफलता के लिए मीडिया और विपणन में दक्ष बनाने पर बल दिया।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री स्वाति शर्मा ने स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को उत्पादक और नवप्रवर्तक बताया । उन्होंने स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को गतिशील बाजारों के अनुरूप सशक्त बनाने, उन्नत कौशल से लैस करने और विश्व बाजार के मूल्य से अवगत कराने की वकालत की। उन्होंने कहा, 2047 तक विकसित भारत के लिए विश्व बाजार के मूल्य से स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को जोड़ना ही होगा।
नई दिल्ली – स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को बिजनेस का कर्णधार बनाने पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी -नजरिया न्यूज
इंडिया पोस्ट, रिलायंस फाउंडेशन, बीएमजीएफ, फ्लिपकार्ट, क्रेमिका, जीटी, एनआईएफटी, बिग ब्रांड थ्योरी, फैब इंडिया, रंगसूत्र, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई), वूमेन ऑन विंग्स, देहात, जयके एंटरप्राइजेज, शाही एक्सपोर्ट्स, मिनर्वा, आईटीसी लिमिटेड के प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य उद्योग विशेषज्ञों ने विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक विचार साझा करते हुए राष्ट्रीय ब्रांड,
सरस का संरक्षक बनने,
उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
डिजिटल साक्षरता और बाजार तक आपूर्ति के लिए बुनियादी ढांचे, विपणन, ई-कॉमर्स, ट्रेसिबिलिटी और सीआरएम प्रणालियों के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाने की क्षमता विकसित करने की जानकारी दी।
सत्र में मानक तथा एसएचजी-अनुकूल गुणवत्ता प्रोटोकॉल की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया तथा विपणन का पता लगाने और क्षमता निर्माण के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठाने पर भी जोर दिया गया।
चर्चा का समापन करते हुए टी. के. अनिल कुमार ने सभी गणमान्य व्यक्तियों को उनके विचार प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद दिया और इस बात की पुष्टि की कि डीएवाई- एनआरएलएम सत्र के दौरान साझा किए गए व्यावहारिक समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने का कार्य किया जाएगा।






















