न्यूज इंफार्मेशन – अस्तित्व समाप्त हो जाने की आशंका पर गजा पर हमला कर रहा इसराइल ने ईरान को बनाया निशाना
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 14जून।
भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर तब हवाई हमला किया था जब पाकिस्तान ने भारत पर आतंकवादी भेजकर हमला किया था। वहीं बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इसराइल को आशंका थी कि ईरान उसके देश का अस्तित्व समाप्त कर सकता है, इसलिए हमला बोल दिया।इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इसराइल के वजूद को बचाने के लिए ये कार्रवाई ज़रूरी है। अर्थात युद्ध की नियति को समाप्त करने के लिए इसराइल युद्ध में कूद पड़ा है।
फिलहाल मीडिया की तरफ से थोड़ी राहत देने वाली खबर यह है कि इसराइल और ईरान के बीच लड़ाई दो देशों के बीच ही सीमित बताई जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र में और अन्य जगहों पर व्यापक रूप से दोनों से संयम बरतने की अपील की जा रही है। फिलहाल, इसराइल ने लगातार दूसरे दिन भी ईरान पर हवाई हमले करने के दावे किए हैं। अगर लड़ाई और भड़कती है, और फैलती है तो विश्व की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ेगा। युद्ध और व्यापक होने और नहीं होने का संकेत इससे मिलता है:
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका इन हमलों में शामिल नहीं है।

फाइल फोटो -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी
अमेरिका के तमाम खंडनों के बावजूद ईरान स्पष्ट रूप से मानता है कि इसमें अमेरिकी बलों की भूमिका है और कम से कम उसने इसराइली हमलों में मदद की है।
गौरतलब है कि इसराइल द्वारा गजा पर भी हमला किया जा रहा है।गजा में युद्ध विराम के एक अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की नीति अमेरिका और दक्षिण एशिया के देशों से जुदा रही। जिससे प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी असहमत हैं।
न्यूज के मुताबिक ग़ज़ा में तत्काल बिना शर्त और स्थायी युद्धविराम की मांग करने वाले प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में हुई वोटिंग से भारत दूर रहा, जिससे कांग्रेस पार्टी सहमत नहीं है । समाचार के अनुसार गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में ग़ज़ा में युद्धविराम को लेकर ‘नागरिकों की सुरक्षा और क़ानूनी और मानवीय दायित्व कायम रखना’ शीर्षक से एक प्रस्ताव पेश किया गया था। विश्व के 193 देशों में से 149 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। भारत सहित 19 और राष्ट्रों ने वोटिंग नहीं की। इसे अमेरिका से भारत की अलग नीति के तौर देखा जा रहा है, क्योंकि अमेरिका के सहयोगी रहे कई देशों ने पक्ष में वोट किया है।दक्षिण एशिया में भारत को छोड़कर बाकी सभी मुल्कों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है।






















