नजरिया न्यूज। भरगामा
क्या शिक्षा सेवा है या व्यवसाय? जवाब तलाशना अब जरूरी हो गया है
शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार भले ही हर स्तर पर प्रयासरत हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है।
इस व्यवस्था पर 20 सुत्री अध्यक्ष नवीन प्रसाद श्रीवास्तव, भाजपा नेता अशोक कुमार सिंह, युवा नेता सितांशु शेखर पिंटू,युवा नेता बबलू रजक, सोशल एक्टिविस्ट असलम बेग ने बताया भरगामा प्रखंड सहित आसपास के क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों के शिक्षक ही शिक्षा प्रणाली को कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। मामला तब गंभीर हो जाता है जब विद्यालयों के शिक्षक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा विद्यालय में देने के बजाय उन्हें निजी ट्यूशन सेंटर पर पढ़ने की सलाह देने लगते हैं। कई शिक्षक तो खुद अपने निजी कोचिंग संस्थान चला रहे हैं और उसी में अधिक समय दे रहे हैं। अगर शिक्षा निजी संस्थानों से ही लेनी है, तो फिर सरकार का करोड़ों रुपये शिक्षकों के वेतन पर खर्च करना बेमानी प्रतीत होता है।
प्रखंड क्षेत्र में कोचिंग संस्थान कुकुरमुत्ते की तरह फैलते जा रहे हैं। इनमें कई कोचिंग ऐसे हैं, जिनका संचालन स्वयं सरकारी शिक्षक कर रहे हैं। इससे न सिर्फ सरकारी नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि नैतिक मूल्यों का भी ह्रास हो रहा है। इस स्थिति का सबसे बुरा असर उन गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों पर पड़ रहा है, जो निजी ट्यूशन का खर्च नहीं उठा सकते। ऐसे छात्र सरकारी विद्यालयों पर ही निर्भर रहते हैं, लेकिन उन्हें वहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती। नतीजतन, ये छात्र बेहतर अंक लाने से वंचित रह जाते हैं और उनके भविष्य पर सवाल खड़े हो जाते हैं। यह न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक असमानता को भी बढ़ावा देता है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह इस गम्भीर समस्या का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष और सघन जांच कराए तथा दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे।






















