संजय कुमार संवाददाता पलासी अररिया
सोमवार को श्री राम चरित मानस ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस पर प्रवचन करते हुए संस्थान के संथापक व संचालक गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जीे की शिष्या साध्वी महामाया भारती ने कहा किे इस ज्ञान की भूमि मिथिला में सत्संग एवं भगवान की कथा की परंपरा रही है । भगवान की कथा सभी संशयों का नाश करती है । मनुष्य के जीवने में जब संशय का नाश होता है तो वह परमात्मा को प्राप्त कर लेता है । मानव के जीवन से संशय का नाश नहीं हुआ तो वो अपना इस लोक को और परलोक दोनों का सर्वनाश कर बैठता है । मनुष्य के जीवन मे संशय अज्ञानता के कारण ही होता है।
उन्होंने कहा कि रामचरित मानस भी कहती है कि जैसे भ्रम के कारण रस्सी को सर्प समझ लेते हैं वैसे ही मानव इस संसार को ही सत्य समझ लेता है । जब जीवन में संत आते है भगवान की कथा सुनाते हैं और फिर जब सत्संग होता है तो मानव का यह भ्रम दूर होता है । भगवान की जब जीव पर कृपा होती है तब सत्संग प्राप्त होता है ।
अजामिल , अंगुलिमाल , रत्नाकर ,गणिका वेश्या आदि अनेकों लोग अपने जीवन को सत्संग के माध्यमसे ही धन्य कर पाए । रामचरित मानस में सत्संग की बड़ी महिमा कही गई है। सत्संग का शाब्दिक अर्थ होता है सत्य जमा संग अर्थात सत्य का संग कर लेना। सत्य केवल ईश्वर है इसका मतलब ईश्वर का संग कर लेना ही सत्संग है । जब सच्चे संतों के द्वारा भगवान की कथा की जाती है और सच्ची श्रद्धा से कोई भी व्यक्ति भगवान की कथा को सुनता है तो उन संतो के द्वारा भगवान का दर्शन कराया जाता है । भगवान भोलेनाथ ने दंडकारण्य में ऋषि अगस्त से कथा सुनी भगवान का दर्शन हुआ । हनुमान के द्वारा सुग्रीव ने कथा सुनी भगवान का दर्शन हुआ । भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन ने कथा सुनी तो अर्जुन को भगवान का दर्शन हुआ ।
स्वामी ने आगे कहा कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान जिसके संथापक व संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी है उनके विशेष अनुकम्पा से आज वही कथा सुना रहा हूँ जिसके उपरांत जिन श्रद्धालु को भगवान का दर्शन करने की इच्छा होगी उन्हें दर्शन कराया जाएगा । भगवान का दर्शन कल्पना का विषय नहीं है । बल्कि यह प्रत्यक्ष अनुभूति है । भगवान कहीं न कहीं मेरे ही अंदर है । वही भगवान मेरे अंदर विराजमान है जिसके कारण ही हम एम दूसरे को देख पा रहे है सुन पा रहे है । जिस घड़ी वो इस शरीर से निकल जायेगा ये आंखे नही देख पाएगी ।
उसी ईश्वर को तत्व रूप मेंभगवान का दर्शन कल्पना का विषय नहीं है । बल्कि यह प्रत्यक्ष अनुभूति है भगवान कही नही मेरे ही अंदर है वही भगवान मेरे अंदर विराजमान है जिसके कारण ही हम एम दूसरे को देख पा रहे है सुन पा रहे है । जिस घड़ी वो इस शरीर से निकल जायेगा ये आंखे नही देख पाएगी उसी ईश्वर को तत्व रूप में देखना उसका प्रत्यक्ष अनुभति ही सत्संग है हमारे गुरुदेव कहते है कि ईश्वर का साक्षात्कार करना प्रत्येक मनुष्य का अधिकार है आइये दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आपका आह्वान करती है कि आप अपने अंदर स्थित परमात्मा का दर्शन करें और अपने जीवन को धन्य करें






















