नजरिया न्यूज। भरगामा। जीतू दास।
शनिवार शाम माह-ए-रमजान का चांद नजर आते ही मुस्लिम समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। रविवार को पहला रोजा रखा गया, जिससे पूरे क्षेत्र में रमजान की रौनक दिखने लगी। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में अकीदतमंदों की चहल-पहल बढ़ गई और मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने पहुंचे। कई मोहल्लों को आकर्षक तरीके से सजाया गया, जिससे रमजान का पाक माह और भी खास नजर आने लगा।
जामिया ताहिरा लील बनात सिरसिया हनुमानगंज के मौलाना ईशा नोमानी ने बताया कि रमजान-उल-मुबारक का महीना मुसलमानों के लिए सबसे अफजल (श्रेष्ठ) महीना माना जाता है। इस महीने में रोजेदार तीस दिनों तक भूख-प्यास सहकर खुदा की इबादत करते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि रमजान वह महीना है जिसमें शैतान को कैद कर लिया जाता है और जन्नत के तमाम दरवाजे खोल दिए जाते हैं। यह माह सब्र, रहमत और बरकत का महीना होता है, जिसमें इंसान को भूख-प्यास की तकलीफ महसूस कराई जाती है, ताकि वह गरीबों और जरूरतमंदों का दर्द समझ सके।
फोटो कैप्सन :- पहला रोजा पर नमाज अदा करने पहुंचे लोग
रविवार को पहले रोजे के साथ ही मस्जिदों में तरावीह की विशेष नमाज अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। पूरे माह मस्जिदों में कुरान की तिलावत और विशेष इबादत का सिलसिला चलता रहेगा।
रमजान की शुरुआत होते ही बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई मुस्लिम मोहल्लों में रोशनी और सजावट की गई है, जिससे रमजान का पाक माह और भी खुशनुमा नजर आ रहा है।
रमजान सिर्फ इबादत का महीना ही नहीं, बल्कि यह इंसानियत, भाईचारे और आत्मसंयम का भी संदेश देता है।






















