आदित्य दत्ता नजरिया न्यूज़ रानीगंज
लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में रानीगंज सत्संग केंद्र में हुआ अंतिम संस्कार
बागडोगरा से दिल्ली एम्स जाने के क्रम में दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही 26 फरवरी 2025 को पूज्य शचिकांत जी महाराज ने अपने भौतिक शरीर का त्याग कर दिया। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे संत समाज और श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के प्रिय शिष्य महर्षि पंडित विष्णुकांत शास्त्री जी के उत्तराधिकारी के रूप में पूज्य शचिकांत जी महाराज ने संत परंपरा में अमूल्य योगदान दिया था।उनके पार्थिव शरीर को सभी शिष्यमंडलियों द्वारा श्रद्धा-सम्मान के साथ लाया गया और 1 मार्च 2025 को उनका अंतिम संस्कार रानीगंज के सत्संग केंद्र में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर महर्षि मेंही आश्रम, कुप्पाघाट, भागलपुर से आए गुरु चरण सेवी प्रमोद बाबा, स्वामी निरमलानंद बाबा, परमानंद बाबा, ओमानंद बाबा समेत कई संत-महात्माओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।पूज्य शचिकांत जी महाराज का जीवन संत परंपरा की अखंड ज्योति के रूप में समर्पित रहा। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में भक्तों को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी और सत्संग व ध्यान के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का कार्य किया। उनके आशीर्वाद से लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त हुई।उनके अंतिम दर्शन के लिए दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु पहुंचे और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अहले सुबह ही उनकी अंतिम यात्रा निकाली पूरे नगर का भ्रमण करते हुए विधि-विधान के साथ सत्संग केंद्र में अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जहां उनके भक्तों और संतों ने गुरु परंपरा को नमन करते हुए उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी।पूज्य शचिकांत जी महाराज के महाप्रयाण से संपूर्ण संत समाज ने एक दिव्य संत को खो दिया, लेकिन उनके द्वारा दी गई आध्यात्मिक शिक्षा और प्रेरणाएं अनंत काल तक मार्गदर्शन करती रहेंगी।रानीगंज से आदित्य दत्ता की खास रिपोर्ट






















