– 31 मार्च कुल 40 दिनों तक लगातार की जाएगी एनसीडी स्क्रीनिंग
– 2 हफ्ते से ज्यादा समय से खासी हो तो टीबी की जाँच जरूर कराएं
बेतिया। 20 फ़रवरी
आयुष्मान आरोग्य मंदिर, पूर्वी करगहिया में स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मुर्तजा अंसारी ने गुरुवार को किया। इस अवसर पर सुबह से ही काफ़ी भीड़ देखी गई। इस दौरान 150 से अधिक लोगों की एनसीडी स्क्रीनिंग, टेली मेडिसिन, टीबी स्क्रीनिंग, एएनसी चेकअप एनसीडीओ, सीएचओ और एएनएम के सहयोग से की गई। इस मौके पर गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मुर्तजा अंसारी ने बताया कि ग्रामीणों को नजदीकी क्षेत्र में ही स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिले, इसी उद्देश्य के लिए एचडब्लूसी की स्थापना की गई है। उन्होंने सभी ग्रामवासियों को एनसीडी स्क्रीनिंग कराने व बीमारियों के प्रति जागरूक रहने एवं बचने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एवं राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना के निदेशानुसार 20 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक (कुल 40 दिनों तक) जिला अंतर्गत सभी स्वास्थ्य संस्थानों में बीपी, शुगर, ओरल कैंसर, ब्रैस्ट कैंसर एंड सर्वाइकल कैंसर के लिए 30 वर्षों से अधिक आयु की आबादी के लिए जनसंख्या आधारित स्क्रीनिंग बढ़ाने, विशेष जांच अभियान के आयोजन करने का निर्देश दिया गया गया है। उन्होंने बताया की जिला अंतर्गत प्रत्येक प्रखण्ड से 2000 स्क्रीनिंग प्रतिदिन करना है। सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्रत्येक दिन शाम 4 बजे तक स्क्रीनिंग की अद्यतन स्थिति जिला एनसीडी को भेजेंगे।
दो हफ्ते से ज्यादा समय से खासी हो तो टीबी की जाँच कराएं:
डॉ अंसारी ने बताया कि यक्ष्मा केन्द्र सहित सभी अनुमंडलीय व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर टीबी की जाँच व इलाज की सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि 2 हफ्ते से ज्यादा समय से बलगम वाली खांसी, बुखार हो, लगातार वजन कम हो तो टीबी की जाँच कराना चाहिए। ये टीबी होने के लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि टीबी होने पर घबराने की जरूरत नहीं है। इसमें दवा का पूरा कोर्स करने व इलाज कराने पर टीबी ठीक हो जाता है।
टीबी मरीजों से किसी प्रकार का भेदभाव नहीं रखना चाहिए। लेकिन साफ-सफाई व सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। उनसे बातचीत के दौरान मास्क लगाना चाहिए, क्योंकि यह एक संचारी रोग है। जो टीबी मरीजों के सम्पर्क में रहने पर हवा के माध्यम से भी फैलता है।
इस मौके पर एफएलसी, बीएचएम, बीसीएम, सीएचओ, एएनएम, आशा व बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे।

















