- 120 साल से रह रही सेम्पी सिंह का परिवार को किया बेघर।
- अनुमंडल पदाधिकारी ने कोर्ट के आदेश को भी देखना उचित नहीं समझा, चलाया बुलडोजर।
- आखिर क्या बात थी जो कई वर्षों से रहने वाली सेम्पी सिंह को और उनके परिवार को प्रशासन की मौजूदगी में किया बेघर।
- आखिर क्यों अनुमंडल पदाधिकारी फारबिसगंज ने लिया करा रूप।
नजरिया न्यूज पटना।
जोगबनी हाट निवासी वार्ड नंबर 5 की रहने वाली सेम्पी सिंह और उनके परिवार ने जिला पदाधिकारी महोदय अररिया से न्याय की मांग की है। उन्होंने लिखित आवेदन देकर अपनी समस्या का समाधान करने की गुहार लगाई है।
बिहार के अररिया जिले में जोगबनी नगर परिषद क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दबंग मुख्य पार्षद और उनके पति पर गरीब और कमजोर लोगों के घर तोड़ने और मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें उनके घरों से बेघर कर दिया गया है और उन्हें मारपीट की धमकी दी जा रही है।
120 वर्षों से रह रही सेम्पी सिंह और उनके पूरी परिवार को एक झटके में पुलिस प्रशासन और समाज के बुद्धिजीवियों के द्वारा हटा दिया जाता है यह कैसा इंसाफ है जबकि मामला न्यायालय में लंबित है।
प्रशासन के लिए क्या न्यायालय का आदेश जरूरी है या नहीं है। इस मामले को लेकर कोर्ट में स्टे आर्डर लगा होने के बावजूद आखिर बुलडोजर क्यों चला। यह तो सचमुच में जांच का विषय है हालांकि पीड़िता ने जिला पदाधिकारी महोदय अररिया को लिखित आवेदन देके न्याय की गुहार लगाइ है।
इस मामले में आवेदन के मुताबिक पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाएगा।
यह मामला बड़े सवाल को खड़ा करता है कि क्या हमारे देश में गरीब और कमजोर लोगों को उनके अधिकारों के लिए लड़ने की ताकत है?
क्या हमारे देश में राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र गरीब और कमजोर लोगों की मदद करने के लिए तैयार हैं?
इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। साथ ही, हमें अपने देश में गरीब और कमजोर लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए एकजुट होने की जरूरत है।

















