नजरिया न्यूज़ धमदाहा/ पूर्णिया ।
क्या आपको पता है कि अनुमंडल मुख्यालय जी रसगुल्ला को आप बड़े चाय के साथ खाते हैं वह कहां तैयार किया जाता है उसको तैयार करने में कौन सी सामग्री लगती है अगर नहीं तो सुन लीजिए बंगाल से आता है लेकिन उसमें उपयोग की जाने वाली सामग्री का कुछ भी पता नहीं है। जी हां जमीन निबंधन से लेकर दूसरे महत्वपूर्ण काम करने के लिए अनुमंडल मुख्यालय धमदाहा आने वाले लोगों को दुकानदार बंगाल से टीन में पैक होकर आने वाले रसगुल्ला को खिला रहे हैं। बंगाल से आने वाले रसगुल्ला के संबंध में पूछे जाने पर दुकानदार छुप्पी साध लेते हैं तो इस दिशा में फूड एवं सेनेटरी इंस्पेक्टर द्वारा भी कोई माकूल जवाब नहीं दिया जा रहा है। बंगाल से आने वाला रसगुल्ला बाजार में काम करने के लिए आने वाले लोगों के साथ-साथ शादी विवाह, बर्थडे पार्टी सही दूसरे मांगलिक कार्यों में धर्रल्ले से परोसा जा रहा है। यह रसगुल्ला बाजार में रात के अंधेरे में मंगवाया जाता है जिसे दिन के उजाले में सरे आम लोगों के थाली में परोसा जा रहा है। हालांकि क्षेत्र के बहुतेरे लोग टीन में पैक होकर आने वाले रसगुल्ला से वाकिफ तो है लेकिन अधिकतर लोगों को यह पता नहीं है रसगुल्ला बंगाल से तैयार होकर आ रहा है। और ना ही लोगों को यह पता है कि धर्रल्ले से परोसा जाने वाले इस रसगुल्ला को तैयार करने में किस प्रकार की सामग्री का उपयोग किया जाता है।
आखिर इसे सामग्री से तैयार किया जाता है कि रसगुल्ला 10 दिन से अधिक समय तक लोगों की थाली में परोसने लायक बचा रहता है। क्षेत्र के अधिकतर लोगों में अभी भी टीन में बंद रसगुल्ला के संबंध में यही जानकारी है कि यह रूपाली प्रखंड के डूमर से महुआ दूध से तैयार होकर आता है। जबकि वास्तविकता में रसगुल्ला बंगाल में तैयार किया जाता है। इस रसगुल्ला को तैयार करने में लगने वाली सामग्री के संबंध में किसी को कुछ पता नहीं है।























