- असंस्कारी राजनीतिज्ञ दल को मतदान का दुष्परिणाम मतदाताओं को सबसे अधिक भुगताना पड़ता है!
- मंहगाई , कुशासन और अव्यवस्था राजनीति में निष्काम भाव के अभाव का दूष्परिणम है!
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज अररिया, बिहार, 13 अप्रैल।
भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को प्रत्येक राजनीतिक दल(शरीर) के संस्कार विषय में (प्रकृति, पुरुष तथा चेतना के गुण ) बताया हैं:
ऋषिभिर्बहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधै: पृथक ।
ब्रम्हसूत्रपदैश्चैव हेतुमभ्दिर्वैनिश्चितै।।5।।
संस्कार युक्त राजनीतिज्ञ दल के लक्षण क्या हैं?
निष्काम भाव से चुनाव लड़ना ! ऐसा दल संविधान के अनुसार शासन करेगा । सकाम भाव वाले राजनीतिज्ञ अंग्रेज शासकों की तरह देश के धन का दुरुपयोग करेंगे। डीजल, पेट्रोल और गैस के मूल्यों के साथ मंहगाई बढ़ेंगी!
भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को प्रकृति पुरुष तथा चेतना के चौथे श्लोक में कर्म-क्षेत्र (राजनीतिक दल) का संदेश दिया है!
विचार क्या हैं और कौन इसे परिवर्तित करता है। शोषण करने के विचार क्यों उत्पन्न होते हैं? इसे जान लेना क्यों आवश्यक है? जान लेने वाले मतदाताओं की प्राप्ति क्या होगी? नहीं जानने पर संविधान की शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
भगवान श्रीकृष्ण प्रकृति पुरुष तथा चेतना के पांचवें श्लोक में चौथे श्लोक का उत्तर देते हुए अर्जुन से कहते हैं;
विभिन्न वैदिक ग्रंथों में विभिन्न ऋषियों ने सामाजिक कार्यकलापों के क्षेत्र तथा उन कार्यकलापों के ज्ञाता के ज्ञान का वर्णन किया है! इसे विशेष रूप से वेदांत सूत्र में कार्य -कारण तर्क समेत प्रस्तुत किए गए हैं।
भगवान श्रीकृष्ण का ज्ञान, शासन व्यवस्था , शासक और संविधान की शरीर को प्रकृति , पुरुष और चेतना मानकर समझा जा सकता है!
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, हे अर्जुन!- महाभारत युग में ऋषियों और मुनियों द्वारा दिए गए ज्ञान को हर युग में पुन:-पुन: समझना चाहिए! अर्जुन से भगवान श्री ने कहा :
कौरवों से तुमको ज्ञानयुक्त युद्ध करना चाहिए। निष्काम भाव से युद्ध करना चाहिए!
आज के अर्थ में तात्पर्य , कितने सांसद और विधायक तथा राजनीतिक दल निष्काम भाव से आज चुनाव लड़ रहे हैं। क्या भाजपा निष्काम भाव से चुनाव लड़ रही है या लड़ती है? यदि हां तो मतदान भाजपा को करना चाहिए! यदि भाजपा निष्काम भाव से चुनाव नहीं लड़ रही है तो अन्य विकल्प पर मतदाताओं को विचार करना चाहिए? क्रमशः जारी…


















