दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें …
बीरेंद्र पांडेय शिक्षा संवाददाता किशनगंज, 08 अप्रैल।
बिहार प्रदेश के किशनगंज जिला क्षेत्र में तेजी से बढ़ता तापमान अब केवल मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि गंभीर चेतावनी बनकर उभर रहा है। लू और अत्यधिक गर्मी का प्रभाव सीधे मानव शरीर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है, जिससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य जानलेवा स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार व्यक्ति इसके प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे परिदृश्य में केवल उपचार नहीं, बल्कि समय रहते जागरूकता और बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार लोगों को सतर्क रहने, दिनचर्या में बदलाव लाने और सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि किसी भी अनहोनी से पहले ही बचाव सुनिश्चित किया जा सके। सात अप्रैल को सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि वर्तमान समय में जिले में कृषि कार्य, निर्माण कार्य, व्यापारिक गतिविधियाँ और वैवाहिक आयोजन तेजी पर हैं। ऐसे में लोगों को अपनी दिनचर्या में बदलाव करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें और यदि अत्यंत आवश्यक हो तो छायादार स्थानों में रुकते हुए पर्याप्त पानी का सेवन करें।गर्मी और लू को हल्के में लेना घातक साबित हो सकता है। शरीर में पानी की कमी और तेज धूप के संपर्क में आने से हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए समय का सही प्रबंधन, पर्याप्त तरल पदार्थों का सेवन और खुद को ठंडा रखना बेहद जरूरी है।
बारिश की कमी से बढ़ा तापमान, हीट स्ट्रोक का खतरा
गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उर्मिला कुमारी ने बताया कि जिले में बारिश नहीं होने के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।उन्होंने कहा कि हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, डायरिया, त्वचा रोग और फूड प्वाइजनिंग जैसी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, तेज नब्ज और बेहोशी तक की स्थिति बन सकती है।उन्होंने लोगों से अपील की कि दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें और नियमित अंतराल पर पानी एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।
खानपान और जल शुद्धता पर विशेष ध्यान दें
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने जिलेवासियों से साफ-सफाई और खानपान में विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए केवल शुद्ध पेयजल का ही सेवन करें और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें। ताजे और स्वच्छ भोजन को ही प्राथमिकता दें।उन्होंने बताया कि नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी, गन्ने का रस और मौसमी फलों के जूस शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करते हैं, जबकि बासी भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सतर्कता आवश्यक
डॉ. उर्मिला कुमारी ने बताया कि गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव नवजात, छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। इसलिए इस आयु वर्ग के लोगों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि बिना आवश्यकता उन्हें घर से बाहर न निकालें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो उन्हें हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनाएं और छाता, टोपी या गमछे से सिर एवं चेहरा ढंककर रखें।
स्कूलों के समय में बदलाव, बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता
भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने संवेदनशील कदम उठाते हुए सभी सरकारी विद्यालयों के संचालन समय में बदलाव किया है। अब स्कूल सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक संचालित किए जाएंगे।यह निर्णय बच्चों को लू और अत्यधिक तापमान के प्रभाव से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि उनकी शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जिला प्रशासन की अपील: ‘सावधानी ही सुरक्षा’
जिलाधिकारी विशाल राज ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे गर्मी और लू को गंभीरता से लें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।
उन्होंने कहा कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन आमजन की जागरूकता और सावधानी ही सबसे प्रभावी बचाव है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में किसी प्रकार की कमी न रखें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से बाहर न निकलें
अधिक से अधिक शुद्ध पेयजल और तरल पदार्थों का सेवन करें
हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनें
छाता, टोपी या गमछे से सिर और चेहरा ढंकें
खुले एवं बासी खाद्य पदार्थों से बचें
किसी भी शारीरिक समस्या होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क करें
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि गर्मी और लू का यह दौर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यदि समय रहते सतर्कता बरती जाए और प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया जाए, तो हीट स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों से प्रभावी रूप से बचा जा सकता है।



















