हाजीपुर।
वैशाली जिले में एईएस (चमकी बुखार) पर प्रभावी नियंत्रण और इसकी तैयारियों की समीक्षा के लिए मंगलवार को उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फोर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सिविल सर्जन, जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीएसडी), जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला समन्वयक (आईसीएसडी), जिला सामुदायिक उत्प्रेरक और पिरामल स्वास्थ्य के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक के दौरान एईएस पर काबू पाने के लिए की गई तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। 
सदर अस्पताल और पीएचसी में इलाज के पुख्ता इंतजाम
जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. गुड़िया कुमारी ने तैयारियों का विवरण देते हुए बताया कि सदर अस्पताल में दस बेड का पीआईसीयू वर्तमान में कार्यरत है। इसके साथ ही जिले के सभी पीएचसी में चमकी बुखार से ग्रसित बच्चों के इलाज के लिए दो-दो बेड का स्पेशल वार्ड बनाया गया है। स्वास्थ्य संस्थानों में एईएस से संबंधित सभी आवश्यक दवाएं और उपकरण पहले से ही उपलब्ध करा दिए गए हैं ताकि आपात स्थिति में कोई कमी न रहे। 
स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान:
मरीजों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की चौबीस सात रोस्टर ड्यूटी लगाई गई है। प्रशिक्षण के संबंध में जानकारी दी गई कि जिला स्तर पर डॉक्टरों, एएनएम, जीएनएम, सीएचओ और बीसीएम को एईएस का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब ये प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी अपने-अपने केंद्रों पर आशा, जीविका दीदियों, शिक्षकों और पंचायती राज के सदस्यों को प्रशिक्षित करेंगे। 
कंट्रोल रूम की स्थापना और जन जागरूकता के निर्देश:
व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एईएस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसके लिए नोडल पदाधिकारी भी नामित किए गए हैं। समीक्षा के दौरान उप विकास आयुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे जमीनी स्तर पर कर्मियों को प्रशिक्षित करने के कार्य में तेजी लाएं। साथ ही उन्होंने आम लोगों को चमकी बुखार के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर देने का भी निर्देश दिया।






















