प्रवीण वत्स, विशेष संवाददाता नजरिया न्यूज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर 31मार्च।
2026 में उत्तर प्रदेश के लोगों को फैंसला करना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पुनः मुख्यमंत्री बनाना या नहीं बनाना है। मुझे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शासनकाल में डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह का एक फैंसला याद आ रहा है। आप सभी जन कोई न कोई फैंसला याद करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल पर अपना फैंसला सुनाइएगा। हमारा संविधान हमें पांच वर्ष में एक बार शासनकाल पर फैंसला सुनाने का अधिकार देता है।
फैंसला करते समय पंचों को मुंशी प्रेमचंद की कहानी पंच परमेश्वर को पढ़कर पंचों को सुनाना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश के शासनकाल में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के डायरेक्शन पर संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नवीनीकरण वाद पर 2014में फैंसला सहायक निबंधक सोसाइटीज फर्म्स एंड चिटफंड वाराणसी को सुनाना था।
संस्था संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर की स्थापना 1932 में ग्राम पंचायत पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के साधारण किसान भानु प्रताप सिंह ने किया था।
इस संस्था का पंजीकरण सोसाइटी ऐक्ट 1860 के प्रावधानों के तहत 1946में कराया गया था। संस्था का अंतिम नवीनीकरण 1977 में दो वर्ष के लिए 1979 तक सहायक निबंधक सोसाइटीज फर्म्स एंड चिटफंड वाराणसी ने किया था।
वर्ष 2010 में भानु प्रताप सिंह के प्रपौत्र ब्रम्हजीत सिंह को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से जानकारी मिली कि सतीश त्रिपाठी नामक व्यक्ति संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर का प्रबंधक होने का दावा कर रहा है। प्रबंध कार्यकारिणी का चुनाव कराकर विश्वविद्यालय में प्रपत्र जमा करें।
संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के ब्रम्हजीत सिंह ने प्रबंधकारिणी का चुनाव संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नियम उपनियम के अनुसार कराकर तब से आजतक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रपत्र जमा कर रहे हैं। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह के शासन में डिप्टी रजिस्ट्रार मनोज सिंह ने 2014 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद का आदेश – डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी कानून के अनुसार संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का नवीनीकरण करने का फैंसला दोनों पक्षों को सुनने के बाद करें। इस वाद में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शासनकाल में कैंप्रोमाइज डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी ने धृतराष्ट्र की तरह अर्थात आंख होते हुए भी डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी के कार्यालय में मौजूद संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर की प्रबंधकारिणी से संबंधित साक्ष्यों को नजरांदाज करते हुए फैंसले में लिखते हैं:
दोनों पक्षों को सुना गया। सतीश त्रिपाठी ने साक्ष्य देते हुए कहा कि संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर के प्रबंधक कृष्णदेव त्रिपाठी ने 1975में नवीनीकरण के लिए आवेदन दिया था। 1983में उसी आवेदन पर डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी ने संस्था संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नाम में आंशिक परिवर्तन करते हुए नया पंजीकरण नंबर जारी किया। यह किस सर्कुलर के आधार पर किया, डिप्टी रजिस्ट्रार जाने। ब्रम्हजीत सिंह द्वारा प्रस्तुत सभी साक्ष्य फर्जी है।
डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह ने 2014में फैंसला सुनाया कि 1983में संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का किया गया पुनः पंजीकरण कानून के अनुसार न्यायसंगत है।
फर्जी प्रबंधक कृष्णदेव त्रिपाठी और उनके उत्तराधिकारी सतीश त्रिपाठी का इतिहास:
1980के दशक में कृष्णदेव त्रिपाठी का भतीजा योगेश त्रिपाठी जिला विद्यालय निरीक्षक जौनपुर के कार्यालय में बाबू के पद पर संस्थापित था।माया कांत संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के प्रधानाध्यापक थे। सतीश त्रिपाठी योगेश त्रिपाठी का भतीजा है। भानु प्रताप सिंह संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के प्रबंधक थे। वर्ष 1982में भानु प्रताप सिंह का स्वर्गवास हो गया। भानु प्रताप सिंह के पुत्र का स्वर्गवास पहले ही हो चुका था।
संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के प्रबंधक ब्रह्मजीत सिंह ने बताया:
संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नियम उपनियम के अनुसार भानु प्रताप सिंह का रक्त संबंधी ही संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का प्रबंधक निर्वाचित होने कि पात्रता रखता था।
वर्ष 2006 में रजिस्ट्रार उत्तर प्रदेश से जिला विद्यालय कार्यालय जौनपुर में बड़ा बाबू योगेश त्रिपाठी ने सांठगांठ की। 1983की डेट से संस्था संस्कृत संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पुनः पंजीकरण कराया गया। वर्ष 2006 में पुनः पंजीकृत संस्था का नवीनीकरण किया गया। पुनः पंजीकृत संस्था संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के 1946 के नियम उपनियम को बदल दिया गया जिसके कारण वर्ष 2014के फैंसले में डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह ने सतीश त्रिपाठी को प्रबंध़क मानते हुए 1983 में पुनः पंजीकरण को वैधानिक ठहरा दिया।
फिलहाल उक्त षड्यंत्र की जनशिकायत के माध्यम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई है। डीएम जौनपुर के द्वारा भी जिला विद्यालय निरीक्षक से जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शासनकाल में अधिकारी निरंकुश थे। वर्ष 2014 में डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी के द्वारा संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के मामले में सुनाया गया फैंसला इसकी बानगी प्रस्तुत करता है।





















