गुरुवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बनगांव रोड स्थित शांति अनुभूति भवन में संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका (अगस्त 2007- मार्च 2020) डॉ० दादी जानकी जी की छठी पुण्यतिथि वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में मनाई गई।
इस अवसर पर दादी जी के जीवन चरित्र एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय सेवाकेन्द्र प्रभारी स्नेहा बहन ने कहा कि दादी जी का बचपन से ही अध्यात्म के तरफ़ गहरा झुकाव था। ईश्वर से मिलने की ललक उनके मन में सदैव हिलोरे लेती रहती थी। उनके जीवन में एक नया मोड़ आया जब उन्होंने संस्थान के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा से मुलाक़ात की। उनसे मिलते ही उनके द्वारा साक्षात परम ज्योति निराकार परमपिता परमात्मा शिव के दिव्य ज्योति स्वरूप का उन्हें अनुभव हुआ और उस अनुभव में उन्हें उस दिव्य ज्योति पुंज से बहुत अपनेपन का आभास हुआ और मानो उनके जीवन की तलाश पूरी हो गई।
उस दिन ही उन्होंने अपना समस्त जीवन परमात्म-कार्य के लिए न्यौछावर करने का संकल्प किया। उन्होंने जीवन पर्यंत परमात्मा से प्राप्त ज्ञान-गुण-शक्तियों को सारे विश्व में अपने मन-वचन-कर्म से प्रचारित-प्रसारित करने का कार्य किया। विदेशी भाषाओं का ज्ञान न होने पर भी सभी उनकी नयनों और शुभ भावनाओं की भाषा बख़ूबी समझते। उनका जीवन राजा जनक समान संसार में रहते हुए सांसारिक बातों से निर्लिप्त था। 104 वर्ष की आयु में नश्वर शरीर का त्याग करने तक वे स्वयं को युवा ही समझती थीं। उनकी एकाग्रता का स्तर इतना उच्च कोटि का था कि टेक्सास यूनिवर्सिटी ने कई स्तर की जाँच के बाद उन्हें विश्व की सर्वाधिक स्थिर मन की महिला घोषित किया। उनके नेतृत्व में संस्थान ने अनेकानेक उपलब्धियां हर क्षेत्र में अर्जित कीं। भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी की। उन्होंने अपने जीवन से विश्व एकता का संदेश दिया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण था कि आध्यात्मिकता वह धागा है जो सभी धर्मों को एक सूत्र में बाँधने का कार्य कर सकता है। आध्यात्मिकता का अर्थ है स्वयं सहित सभी को आत्मा निश्चय करना और एक परमात्मा पिता की संतान होने के नाते सारे विश्व को अपना परिवार समझना। आज संस्थान के लाखों भाई-बहन उनके महान और दिव्य जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।सभी ने दादीजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिव शंकर भाई, शशि भाई, रविशंकर भाई, अवधेश भाई, मनोज भाई, रजनीश भाई, सिकंदर भाई, सूरज भाई सहित सैकड़ों भाई-बहन उपस्थित थे।






















