पटना:
बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य स्तर में सुधार के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ी पहल शुरू की है। गुरुवार को मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय अंतरविभागीय बैठक में ‘अंकुरण’ परियोजना की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक श्री विनायक मिश्र ने की, जिसमें स्वास्थ्य, कृषि, वन विभाग और यूनिसेफ के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
पोषण वाटिका और स्वास्थ्य जांच पर जोर:
बैठक के दौरान निदेशक विनायक मिश्र ने निर्देश दिया कि राज्य के लगभग 40 हजार सरकारी स्कूलों में पोषण वाटिका का निर्माण किया जाए। इसके लिए उद्यान एवं बागवानी मिशन से हर स्कूल को कम से कम 10-10 सहजन के पौधे या बीज उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से शत-प्रतिशत स्कूलों में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने और उन्हें आयरन फोलिक एसिड की गोलियां निरंतर बांटने की योजना तैयार की गई है।
पोषण और जीवनशैली का होगा वैज्ञानिक आकलन:
बैठक में डॉ. उषा सिंह ने जानकारी दी कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय (पूसा) और यूनिसेफ के सहयोग से प्रदेश के 9 प्रमंडलों के चयनित स्कूलों में ‘NEAT-S’ टूल के जरिए बच्चों के पोषण और जीवनशैली का आकलन किया जाएगा। यूनिसेफ के विशेषज्ञों का मानना है कि 10 से 19 वर्ष की आयु बच्चों के सुधार का ‘दूसरा अवसर’ होती है, इसलिए स्कूलों के साथ-साथ उनके घरों में भी खान-पान की आदतों में बदलाव लाना बेहद जरूरी है।
स्कूलों में महकेंगे फलदार और हर्बल पौधे:
पर्यावरण संरक्षण और बच्चों को प्रकृति से जोड़ने के लिए सामाजिक वानिकी के निदेशक श्री आलोक कुमार ने स्कूलों को फलदार पौधे उपलब्ध कराने की सहमति दी है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि यदि विद्यालय रुचि दिखाएं, तो वन विभाग के सहयोग से वहां ‘हर्बल गार्डन’ भी तैयार किए जाएंगे। बैठक के अंत में सभी विभागों के प्रतिनिधियों ने जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों के साथ मिलकर ‘अंकुरण’ परियोजना की सफलता के लिए साझा प्रयास करने का संकल्प लिया।






















