-नर्सों का गरिमापूर्ण व्यवहार दे रहा प्रसूताओं का मानसिक संबंल
मुजफ्फरपुर।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आम जन का भरोसा जगाना एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन कुढ़नी प्रखंड के मनियारी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ने इस धारणा को बदल दिया है। जिला प्रशासन द्वारा प्रथम श्रेणी प्रसव केंद्र (एल-वन सेंटर) के रूप में चयनित यह अस्पताल आज पूरे जिले के लिए एक आदर्श मिसाल बनकर उभरा है। अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मियों की अटूट निष्ठा का ही सुखद परिणाम है कि बीते एक वर्ष के दौरान यहाँ कुल 623 महिलाओं का सुरक्षित और सफल संस्थागत सामान्य प्रसव कराया गया है।
विश्वास की जीत: लाभार्थी की जुबानी अस्पताल की कहानी-
अस्पताल में जांच के लिए पहुंची लाभार्थी पार्वती देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि “शुरुआत में मन में घबराहट थी कि सरकारी अस्पताल में कैसी व्यवस्था होगी, लेकिन यहां आने के बाद मेरा डर खत्म हो गया। यहाँ की नर्स दीदी और डॉक्टर साहब मरीजों से परिवार के सदस्य की तरह बात करते हैं। एएनएम नीलम दीदी ने लेबर रूम में मुझे बहुत सहारा दिया और हिम्मत बढ़ाई। आशा दीदी भी समय-समय पर घर आकर हाल-चाल लेती रहीं और मुझे अस्पताल लाने में मदद की। यहाँ की व्यवस्था और सफाई देखकर अब गाँव की अन्य महिलाएँ भी निजी अस्पतालों के बजाय यहीं आना पसंद कर रही हैं।”
दृढ़ संकल्प: डॉ. गौतम के नेतृत्व में बदली अस्पताल की सूरत-
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. गौतम ने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम को देते हुए कहा कि “623 प्रसव का यह आंकड़ा हमारे लिए केवल एक संख्या नहीं, बल्कि समाज का हमारे प्रति बढ़ता हुआ अटूट विश्वास है। हमारा प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी गर्भवती महिला को प्रसव के लिए शहर की ओर न भागना पड़े। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हम उन महिलाओं की विशेष निगरानी करते हैं जिनकी गर्भावस्था में जोखिम होने की संभावना होती है। एएनएम नीलम के नेतृत्व में हमारा लेबर रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रहता है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। हम जच्चा और बच्चा दोनों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
नवाचार से मिली कामयाबी: संस्थागत प्रसव बढ़ाने की अनूठी पहल-
मनियारी केंद्र में संस्थागत प्रसव की संख्या में हुई इस वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। डॉ. गौतम ने बताया कि अस्पताल ने ‘ग्राम स्वास्थ्य और पोषण दिवस’ के माध्यम से उन महिलाओं से सीधा संपर्क साधा जो अस्पताल आने में झिझकती थीं। इसके अलावा, अस्पताल परिसर में गर्भवती महिलाओं के लिए स्वागत पूर्ण माहौल तैयार किया गया है। लेबर रूम प्रभारी नीलम के अनुसार, प्रसव के दौरान महिलाओं की गोपनीयता और गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाता है, जिससे उन्हें मानसिक संबल मिलता है। प्रसव के तुरंत बाद नवजात की देखभाल और माता के पोषण के लिए दी जाने वाली सलाह ने भी ग्रामीणों को आकर्षित किया है।
दिसंबर में हुए हैं 67 संस्थागत प्रसव-
वर्ष 2025 के दौरान कुल 623 प्रसवों का सफल संपादन स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। साल की शुरुआत जनवरी में 76 प्रसवों के सुखद आंकड़े के साथ हुई, जो स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति लोगों के विश्वास को दर्शाता है। हालांकि बीच के महीनों में आंकड़ों में स्वाभाविक उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन अगस्त में 77 प्रसवों का रिकॉर्ड स्तर और दिसंबर में 67 प्रसवों की संख्या यह प्रमाणित करती है कि स्वास्थ्य केंद्र साल भर निरंतर और सक्रिय रूप से अपनी सेवाएँ प्रदान करता रहा। जून जैसे चुनौतीपूर्ण समय में भी स्वास्थ्य कर्मियों की प्रतिबद्धता बनी रही, जिसका परिणाम साल के अंत तक एक बेहतर और सकारात्मक स्वास्थ्य रिपोर्ट के रूप में सामने आया है। यह आंकड़े न केवल सुरक्षित प्रसव के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाते हैं, बल्कि आने वाले समय में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए एक मजबूत आधार भी प्रदान करते हैं।
आशा कार्यकर्ताओं का मजबूत तंत्र और पूर्व तैयारी-
अस्पताल की इस उपलब्धि में क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं का योगदान रीढ़ की हड्डी की तरह है। हर महीने की नौ तारीख को आयोजित होने वाले विशेष जांच शिविरों में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाती हैं। यहाँ न केवल उनकी जांच होती है, बल्कि प्रसव से पहले ही जोखिम वाले मामलों को चिन्हित कर उनका विशेष उपचार शुरू कर दिया जाता है। रात के समय आने वाले मरीजों के लिए अस्पताल में बेहतर प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आज मनियारी का यह केंद्र अपनी उत्कृष्ट व्यवस्था और मानवीय व्यवहार के कारण जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है।























