दुर्केश सिंह
संपादकीय प्रभारी
नजरिया न्यूज, 27दिसंबर।
मनरेगा के खात्मे का एक ही मकसद है – गरीबों के रोज़गार के अधिकार को मिटाना। यह लाइन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की है। वे मनरेगा के खात्मा से गांवों की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जता रहे थे। वैसे वास्तविकता यह है कि मनरेगा की 40फीसद राशि ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान कर रही थी। शेष राशि का मजदूर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कोई योगदान नहीं रह गया था। मनरेगा खत्म होने पर पदाधिकारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा: मनरेगा को खत्म करने से राज्यों की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति कम हो जाएगी। मनरेगा से बचाई गई राशि का नुकसान पूरा भारत भुगतेगा – रोज़गार खत्म होंगे, ग्रामीण अर्थव्यवस्था टूटेगी।
राहुल गांधी ने कहा: जब गांव कमजोर होंगे, तो देश कमजोर होगा।























