विवेचना -दंण्डो दमयतातास्मि नीतिरस्मि जीगीषतम्।
मौनं चैवास्मि गुह्यनां ज्ञानं ज्ञानवतामहम्।।भारत और पाकिस्तान ने सीज फायर का जो निर्णय लिया है, उससे दुष्ट का नाश होता है तो सर्वोत्तम निर्णय है। मनुष्य जाति का कल्याण होता है तो सर्वोत्तम निर्णय है।
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दुर्केश बहादुर सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 13मई।_
आपरेशन सिंदूर के बाद की स्थितियों पर मीडिया का एक धड़ा अपने ढंग से विचारों को व्यक्त कर रहा है। महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण ने “मन” में अराजकता की स्थिति के भाव आने पर अर्जुन के संशय को दूर करते हुए कहा :
दंण्डो दमयतातास्मि नीतिरस्मि जीगीषतम्।
मौनं चैवास्मि गुह्यनां ज्ञानं ज्ञानवतामहम्।।
इसका भाव है-अराजकता को दमन करने वाले समस्त साधनों में मैं दण्ड हूं। और जो विजय के आंकक्षी हैं, उनकी मैं नीति हूं। रहस्यों मैं मौन हूं। और बुद्धिमानों में ज्ञान हूं।
भगवान श्री कृष्ण ने अपने ऐश्वर्य और विभूतियों के विषय में उक्त बात कही है।
“जो जन-जन के लिए कल्याणकारी है, वह मैं हूं”। दुष्टों के दमन अनेक साधन हैं। उसमें सबसे महत्वपूर्ण दण्ड है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा:दंड देने वाले मेरा ही स्वरूप है।
अराजकता की स्थिति में विजय प्राप्त करने की अकांक्षा पर,किसकी जीत होगी? इस पर भगवान श्री कृष्ण ने कहा है: “मैं नीति हूं। नीति की विजय होती है”।
सृष्टि के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, “दुष्ट का नाश करना”। भगवान श्री कृष्ण ने कहा, मेरी परा और अपरा शक्ति में जो भेद कर सके , वह ज्ञान मैं हूं। शुक्राचार्य जैसे दूरदर्शी और ज्ञानी नेता,मैं ही हूं।
अर्थात मनुष्य मात्र के कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए दुष्ट का नाश करने वाला मैं हूं। भाव यह है कि दुष्ट का नाश करना है और मनुष्यों के हितों की रक्षा करनी है।
भारत और पाकिस्तान ने सीज फायर का जो निर्णय लिया है, उससे दुष्ट का नाश होता है तो सर्वोत्तम निर्णय है। मनुष्य जाति का कल्याण होता है तो कल्याणकारी निर्णय है।




















