– छपरा के सब-इंस्पेक्टर मो. इम्तियाज वीरगति को प्राप्त, रविवार शाम तक पहुंचेगा पार्थिव शरीर
नजरिया न्यूज़, नई दिल्ली।
जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती आरएस पुरा सेक्टर में शनिवार देर शाम पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज शहीद हो गए। शहीद इम्तियाज बिहार के सारण जिले के गड़खा थाना क्षेत्र स्थित नारायणपुर गांव के निवासी थे। 45 वर्षीय इम्तियाज देश की सेवा में लंबे समय से तैनात थे और कर्तव्य निभाते हुए उन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी।
परिवार को जैसे ही उनके शहादत की खबर मिली, पूरे गांव में मातम पसर गया। शहीद के परिजन बेसुध हैं, तो वहीं गांववालों को अपने वीर सपूत की शहादत पर गर्व भी है। अधिकारियों के अनुसार उनका पार्थिव शरीर रविवार शाम तक उनके पैतृक गांव लाया जाएगा, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सीजफायर के तीन घंटे बाद ही हुआ उल्लंघन
शनिवार शाम 5 बजे भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर लागू हुआ था। पर इसके महज तीन घंटे बाद ही पाकिस्तान ने इसका उल्लंघन करते हुए आरएस पुरा सेक्टर में अकारण गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में सब-इंस्पेक्टर इम्तियाज गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्होंने वीरगति प्राप्त कर ली।
BSF के प्रवक्ता के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रहे सीजफायर उल्लंघन भारत की शांति प्रयासों को चुनौती देने की कोशिश है। लेकिन भारत के जवान हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं।
12 दिनों में 4 जवान शहीद, 60 से ज्यादा घायल
22 अप्रैल से 10 मई के बीच पाकिस्तान की गोलीबारी में अब तक बीएसएफ और सेना के चार जवान शहीद हो चुके हैं, जबकि 60 से अधिक जवान घायल हुए हैं। इसके अलावा 17 आम नागरिकों की भी जान गई है और 60 से ज्यादा लोग घायल हैं। लगातार हो रही इस गोलीबारी से सीमावर्ती इलाकों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
इन घटनाओं में राजौरी के अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त (ADDC) डॉ. राज कुमार थापा भी पाकिस्तानी गोलाबारी में घायल हो गए थे। गंभीर चोटों के कारण इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।
गांव में मातम, लेकिन शहादत पर गर्व
शहीद मोहम्मद इम्तियाज की शहादत की खबर मिलते ही नारायणपुर गांव में मातम छा गया। परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। शहीद के बूढ़े पिता और उनकी पत्नी बार-बार बेहोश हो जा रहे हैं। वहीं गांव के लोग बड़ी संख्या में उनके घर पर जुटने लगे हैं। लोग उनकी बहादुरी की मिसालें दे रहे हैं और कह रहे हैं कि इम्तियाज ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर अमर शहीदों की श्रेणी में अपना नाम दर्ज करा लिया।
स्थानीय प्रशासन की ओर से भी शहीद के परिवार को हरसंभव सहायता देने की बात कही गई है। जिला प्रशासन के अधिकारी रविवार को उनके पार्थिव शरीर को रिसीव करने के लिए एयरपोर्ट जाएंगे और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम यात्रा की व्यवस्था की जा रही है।
सरकार से मुआवजे और स्थायी नौकरी की मांग
गांववालों और परिजनों ने केंद्र और राज्य सरकार से शहीद इम्तियाज को “भारत रत्न” सम्मान देने और उनके परिवार को आर्थिक सहायता के साथ-साथ उनके बच्चों के लिए शिक्षा और उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जो जवान देश के लिए अपनी जान देता है, उसके परिवार की सुरक्षा और सम्मान सरकार की जिम्मेदारी है।
देशवासियों ने दी श्रद्धांजलि
सोशल मीडिया पर भी शहीद इम्तियाज को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। ट्विटर और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर #ShaheedImtiaz और #BiharKaVeer ट्रेंड कर रहे हैं। देश भर से लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनके परिवार को मजबूती प्रदान करने की कामना कर रहे हैं।
शहीद इम्तियाज की शहादत एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि हमारे सैनिक हर दिन अपनी जान को खतरे में डालकर देश की रक्षा करते हैं। उनका बलिदान कभी भूला नहीं जाएगा।




















