वीरेंद्र चौहान, नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज 11अप्रैल।
जिसके घर में बेरोजगार युवक बैठे हैं। वे युवा जो पुलिस भर्ती की परीक्षा उत्तीर्ण करने पर खुश थे। फिर मापतौल परीक्षा भी उत्तीर्ण किए। फिर दौड़ प्रतियोगिता भी कंप्लीट किया।इसके बाद कटआफ मार्क्स के आधार पर उनकी छंटनी कर दी गई। ऐसे युवा उत्तर प्रदेश सरकार को कोस रहे है। ऐसे युवा ही नहीं अपितु सभी बेरोजगारों के लिए राहुल गांधी की पक्की नौकरी देने की घोषणा अच्छे भविष्य की उम्मीद बंधाती है। यह बात बेरोजगार युवाओं के अभिभावकों ने कही।
लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ह्वाट्सएप चैनल पर राहुल गांधी के इस घोषणा पर टिप्पणी करते हुए अभिभावकों ने कहा: उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस भर्ती परीक्ष में उत्तीर्ण नापतौल में उत्तीर्ण, दौड़ में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की छंटनी कट आफ मार्क्स के आधार पर कर देती है। इसकी जगह ऐसे योग्य अभ्यर्थियों को नाम अगली भर्ती तक प्रतीक्षा सूची में रखनी चाहिए थी।
पुनः रिक्तियां निकलने पर पुलिस भर्ती के सेमीफाइनल राउंड तक पहुंचने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती के अभ्यर्थियों को सरकार को देना चाहिए था।
ऐसे बेरोजगार युवाओं के अभिभावकों ने कहा कि जिनके घर में बेरोजगार युवक नहीं हैं, वे बेरोजगारी का दर्द नहीं समझ सकते लेकिन लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी अपवाद है। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024में युवाओं के लिए जो घोषणा की थी, उसे फिर दोहराया है।
राहुल गांधी क्या कहते हैं?
2024 के लोकसभा चुनाव में हमने देश के युवाओं से ‘पहली नौकरी पक्की’ देने का वादा करते हुए ‘1 लाख रुपए वार्षिक अप्रेंटिसशिप’ की गारंटी दी थी।
उन्होंने 11अप्रैल को अपने ह्वाट्सएप चैनल पर पोस्ट बयान में कहा;
एक लाख रुपये वार्षिक अप्रेंटिसशिप’ की उनकी गारंटी
युवाओं के बेहतर भविष्य और बेरोजगारी से राहत दिलाने के लिए यह एक क्रांतिकारी योजना थी।
उन्होंने कहा:
शायद मोदी सरकार को भी इसका अंदाज़ा था, इसलिए हमारे घोषणा पत्र से नकल करते हुए ‘Employment Linked Incentive’ स्कीम की उन्होंने घोषणा की थी।
लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने Employment Linked Incentive पर आगे कहा:
लेकिन दुर्भाग्य देखिए, इस स्कीम से एक भी युवा को लाभ नहीं मिला, क्योंकि ₹10,000 करोड़ की राशि आवंटित करने के बावजूद बिना उपयोग के वापस कर दी गई।
इससे एक बार फिर साफ होता है कि मोदी सरकार के लिए युवाओं का भविष्य कोई मायने नहीं रखता।
जब देश में बेरोजगारी चरम पर है और युवा हताश हैं, तब भी सरकार की यह लापरवाही सिर्फ चौंकाने वाली ही नहीं, शर्मनाक भी है।





















