प्रतिभा सिंह/मीरा प्रवीण वत्स, नजरिया न्यूज, 19मार्च
सुनीता विलियम्स अब धरती पर वापसी को तैयार हैं। नौ महीने से ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में फंसे रहने के बाद, नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता और बुच विल्मोर अंतरिक्ष यान में सवार हो चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार
दोनों का धरती पर उतरने का सफर 17 घंटे का होगा।
सुनीता विलियम्स का अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) छोड़ने को लेकर नासा ने वीडियो शेयर किया है। अंतरिक्ष यात्रियों का ये सफर 17 घंटे का होगा और वो 20 मार्च को पृथ्वी पर लौटेंगे।
एक ख्यातिलब्ध मीडिया ने अध्ययन में बताया कि सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहायो में 1965 में हुआ था। उनका पालन-पोषण भी यही हुआ।
राजघाट पर अपने पिता डॉक्टर दीपक पंड्या के साथ सुनीता विलियम्स
सुनीता विलियम्स अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के माध्यम से अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला है। यह भारत के गुजरात के अहमदाबाद से ताल्लुक रखती हैं। इन्होंने एक महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में 127 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। उनके पिता दीपक पाण्डया अमेरिका में एक डॉक्टर थे।
सुनीता के पिता दीपक पंड्या भारतीय हैं। उनका जन्म गुजरात के मेहसाणा जिले के गांव झूलासन में हुआ। दीपक अहमदाबाद से डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने भाई के पास अमेरिका चले गए।
यहां उन्होंने स्लोवेनियाई मूल की उर्सुलिन बोनी से विवाह किया और उनके तीन बच्चे हुए।उसमें से एक सुनीता भी हैं।
सुनीता के पिता हिंदू और मां कैथोलिक हैं लेकिन उनके पिता ने अपने बच्चों को सभी धर्मों के लोगों का सम्मान करना सीखाया।
डॉक्टर दीपक पंड्या रविवार को भगवद्गीता लेकर चर्च जाते थे और अपने बच्चों को रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाते थे।इससे उनके बच्चों में भारतीय परंपरा से जुड़ाव भी विकसित हुआ।
सुनीता विलियम्स ने अपने अंतरिक्ष मिशन के बाद 2007 और 2013 में दो बार झूलासन का भी दौरा किया था।यह गुजरात की राजधानी गांधीनगर से 40 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।


















