प्रतिभा सिंह, नजरिया न्यूज संवाददाता,नई दिल्ली 01मार्च ।
मोटापा भारत में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है और यह सभी आयु समूहों के लोगों को प्रभावित कर रहा है। इसके साथ-साथ यह मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसे गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के जोखिम को बढ़ा रहा है। अस्वास्थ्यकर आहार, गतिहीन जीवन शैली और पर्यावरणीय कारकों के कारण मोटापा खतरनाक दर से बढ़ रहा है, जिसका असर शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी पर पड़ रहा है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की ओर झुकाव, शारीरिक गतिविधियों में कमी और जीवनशैली में बदलाव ने इस बढ़ते संकट में और वृद्धि की है। यह जानकारी भारत सरकार के पत्र पीआईबी में दी गई है।
जानकारी के अनुसार इस मुद्दे की तात्कालिकता को समझते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने हाल के कार्यक्रम मन की बात के संबोधन में मोटापे को कम करने के लिए विशेष रूप से कम खाद्य तेल की खपत के माध्यम से देशव्यापी जागरूकता और सामूहिक कार्यवाही की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जागरूकता आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए देशभर के प्रमुख व्यक्तियों को नामित किया। सामूहिक कार्यवाही का यह आह्वान व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर मोटापे से निपटने के महत्व पर प्रकाश डालता है, जो एक स्वस्थ और निरोगी भारत की आवश्यकता को पुष्ट करता है। भारत सरकार ने स्वस्थ जीवन शैली, बेहतर पोषण और शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए फिट इंडिया मूवमेंट, एनपी-एनसीडी, पोषण अभियान, ईट राइट इंडिया और खेलो इंडिया सहित कई पहलों का शुभारंभ किया है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करना है, जिससे सभी के लिए एक स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित हो सके। जैसे-जैसे भारत अमृत काल की ओर बढ़ रहा है, नीतिगत सुधारों, सामुदायिक सहभागिता और विनियामक उपायों के माध्यम से मोटापे से निपटने के लिए सरकार और समाज के सभी लोगों द्वारा एक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना, स्थायी खाद्य आदतों को बढ़ावा देना और जागरूकता बढ़ाना इस प्रवृत्ति को बदलने और भविष्य की पीढ़ियों को मोटापे से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अपनी खान-पान की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके हम अपने भविष्य को अधिक मजबूत, स्वस्थ और रोगमुक्त बना सकते हैं।”
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी
मोटापे को समझना,परिभाषा और कारण
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मोटापे को असामान्य या अत्यधिक वसा संचय के रूप में परिभाषित किया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न करता है । मोटापे को वर्गीकृत करने के लिए आमतौर पर उपयोग किया जाने वाला मीट्रिक बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) है, जहां 25 या उससे अधिक का बीएमआई अधिक वजन माना जाता है, और 30 या उससे अधिक का बीएमआई मोटापे के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। भारत में, यदि किसी व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 23.0 और 24.9 किलोग्राम/एम² के बीच है तो उसे अधिक वजन वाला माना जाता है और यदि उसका बीएमआई 25 किलोग्राम/एम² या उससे अधिक है, तो उसे मोटा माना जाता है। रुग्ण मोटापा तब होता है जब किसी व्यक्ति का बीएमआई 35 या उससे अधिक होता है ।
बीएमआई क्या है?
बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), जिसे पहले क्वेटलेट इंडेक्स के नाम से जाना जाता था, यह जांचने का एक सरल तरीका है कि किसी वयस्क का वजन स्वस्थ है या नहीं। इसकी गणना किसी व्यक्ति के किलोग्राम में वजन को मीटर वर्ग में उसकी ऊंचाई (किलोग्राम/मी²) से विभाजित करके की जाती है। बीएमआई पता करने के लिए, किसी व्यक्ति का वजन (किलोग्राम) लें और उसे उसकी ऊंचाई (मीटर) वर्ग से विभाजित करें ।
स्वस्थ बीएमआई रेंज विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों के आधार पर एक सामान्य बीएमआई 18.5 और 24.9 के बीच होती है।
वैश्विक सांख्यिकी
दुनिया भर में वयस्कों और बच्चों दोनों में अधिक वजन और मोटापे का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है। 1990 और 2022 के बीच, मोटापे से ग्रस्त बच्चों और किशोरों (5-19 वर्ष की आयु) का प्रतिशत चार गुना बढ़कर 2 प्रतिशत से 8 प्रतिशत हो गया। इसी अवधि के दौरान, मोटापे से ग्रस्त वयस्कों (18 वर्ष और उससे अधिक आयु) का अनुपात दोगुना से अधिक हो गया, जो 7 प्रतिशत से बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया ।
भारत में मोटापे के आंकड़े
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 (2019-21) के अनुसार, कुल मिलाकर, 24 प्रतिशत भारतीय महिलाएं और 23 प्रतिशत भारतीय पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं।
एनएफएचएस-5, (2019-2021) के अनुसार 15-49 वर्ष की आयु वर्ग में 6.4 प्रतिशत महिलाएं और 4.0 प्रतिशत पुरुष मोटापे से ग्रस्त हैं।
अखिल भारतीय स्तर पर 5 वर्ष से कम आयु के अधिक वजन (ऊंचाई के अनुरूप वजन) वाले बच्चों का प्रतिशत भी एनएफएचएस-4 (2015-16) में 2.1 प्रतिशत से बढ़कर एनएफएचएस-5 (2019-21) में 3.4 प्रतिशत हो गया है ।


















