आम आदमी पार्टी किसी भी भ्रष्टाचार से इनकार करती रही और जांच एजेंसियां घेरती रहीं हैं
प्रतिभा सिंह, नजरिया न्यूज संवाददाता नई दिल्ली, 25फरवरी
दिल्ली विधानसभा में राज्य की पिछली सरकार की शराब नीति से जुड़ी कैग अर्थात सीएजी की रिपोर्ट पेश की गई है। भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली में सरकार बनने के बाद यह रिपोर्ट सदन में पेश की गई है।
यह रिपोर्ट दिल्ली की उस शराब नीति से जुड़ी हुई है, जिसमें हुए कथित घोटाले के आरोप में आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जेल भी जाना पड़ा था।
सीएजी की रिपोर्ट पेश होने के बाद आम आदमी पार्टी दिल्ली की पूर्व कांग्रेस सरकार की शराब नीति को राजस्व में नुक़सान के लिए दोषी ठहरा रही है तो वहीं बीजेपी एक बार फिर से राज्य की पिछली आप सरकार को घेर रही है।
शराब नीति में सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट क्या कहती है..
सीएजी के मुताबिक़ दिल्ली को आबकारी विभाग से मिलने वाले कर राजस्व का एक बड़ा हिस्सा हासिल होता है, जो कुल टैक्स रेवेन्यू का क़रीब 14% है ।
दिल्ली में शराब की सप्लाई और इसकी बिक्री में कई स्तर पर लोग शामिल होते हैं। इसकी शुरुआत शराब बनाने वाले से होती है, जो दिल्ली के बाहर हैं।

सीएजी की जिस रिपोर्ट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामा मचा हुआ है, वह साल 2017-18 से 2020-21 के बीच का लेखा-जोखा है, उस समय दिल्ली में आप की सरकार थी…
वहां से शराब दिल्ली के थोक विक्रेताओं के पास आती है। इसके बाद शराब अलग-अलग कॉरपोरेशन वेंडर्स, निजी वेंडर्स, होटल, क्लब और रेस्तरां के ज़रिए उपभोक्ताओं तक शराब पहुंचती है।
सीएजी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में दिल्ली की नई शराब नीति की वजह से सरकारी राजस्व के नुक़सान की बात की है।
सीएजी की जिस रिपोर्ट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामा मचा हुआ है, वह साल 2017-18 से 2020-21 के बीच का लेखा-जोखा है। इसी दौरान नवंबर 2021 के बाद दिल्ली में शराब नीति में बदलाव किए गए थे, जिसे 1 सितंबर 2022 को वापस ले लिया गया था।
कई अनियमितताओं के बारे में रिपोर्ट
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में एक्साइज़ विभाग के कामकाज पर कई सवाल भी खड़े किए हैं और इससे क़रीब 2027 करोड़ रुपये के नुक़सान का अनुमान लगाया है।
दिल्ली में शराब नीति का मुद्दा लंबे समय से एक राजनीतिक मुद्दा रहा है और इस पर बीजेपी ने उस वक़्त की आम आदमी पार्टी की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
इस मामले की प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी और सीबीआई ने भी जांच की है और आप के कई नेताओं को गिरफ़्तार भी किया था।हालांकि आम आदमी पार्टी लगातार किसी भी भ्रष्टाचार से इनकार करती रही है।


















