टाटा ट्रस्ट्स टाटा ग्रुप के कई ट्रस्ट से मिलकर बना है
नोएल टाटा रतन टाटा के सौतेले भाई हैं
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज,11अक्टूबर।
रतन टाटा का बुधवार की देर रात मुंबई में निधन हो गया था।उसके बाद शुक्रवार को हुई बोर्ड की बैठक में नए चेयरमैन के नाम पर विचार किया गया और सर्वसम्मति से 67 साल के नोएल नवल टाटा को चेयरमैन चुना गया।
नोएल टाटा पहले से ही टाटा संस को संभाल रहे हैं। रतन टाटा के बाद अब नोएल टाटा लगभग 34 लाख करोड़ रुपये के टाटा समूह का नेतृत्व करेंगे।
टाटा ट्रस्ट ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए नोएल टाटा की नियुक्ति की औपचारिक घोषणा भी कर दी है। प्रेस रिलीज में कहा गया है कि नोएल की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। 
गौरतलब है कि टाटा ट्रस्ट्स टाटा ग्रुप के कई ट्रस्ट से मिलकर बना है।नोएल टाटा रतन टाटा के सौतेले भाई है। चूंकि रतन टाटा अविवाहित रहे और उनकी कोई संतान नहीं है ।इसलिए इस बात की चर्चा हो रही थी कि उनके नजदीकी रिश्तेदारों में किसी को समूह की बागडोर सौंपी जा सकती है।
इस लिहाज से सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर नोएल टाटा का नाम सामने आ रहा था। रतन टाटा के निधन के बाद सबसे ज्यादा कयास इस बात को लेकर थी कि आख़िर उन 13 ट्रस्टों की कमान किसके हाथ में होगी, जिनकी 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के टाटा समूह में 66.4 फ़ीसदी हिस्सेदारी है। इन सभी ट्रस्टों की लीडरशिप जिसके पास होगी, उसके पास ही टाटा समूह को चलाने की महती जिम्मेदारी होगी।
चूंकि रतन टाटा ने इन सभी ट्रस्टों का कोई उत्तराधिकार घोषित नहीं किया था। इसलिए उनके सौतेले भाई नोएल टाटा सबसे मजबूत दावेदार बन कर उभरे थे।नोएल टाटा इन 13 ट्रस्टों में सबसे मजबूत सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं।अकेले इन दोनों ट्रस्टों के पास टाटा संस में 55 फीसदी हिस्सेदारी है।























