- 2016 से हजारों कानूनगो के अभाव का दंश झेल रहे किसानों को राहत, लेखपालों को कानून गो के पद पर किया गया प्रमोशन
- कृषि योग्य भूमि से 10प्रतिशत तक कटौती होने के बावजूद कमजोर किसानों को नहीं मिलता घर से सड़क तक पहुंचने का रास्ता
- पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार होने के बावजूद कमजोर किसानों को नहीं दिया जाता है बराबर का हिस्सा
अरुण सिंह, नजरिया न्यूज संवाददाता, लखनऊ, 10अक्टूबर।
2016 से उतर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कानूनगो के कई पद रिक्त चल रहे थे, जिसके कारण भूमि पुनर्संयोजन और चकबंदी प्रक्रिया में बाधाएं उत्पन्न हो रही थीं। इससे किसानों की भूमि से जुड़े विवादों के समाधान में देरी हो रही थी और भूमि सुधार के प्रयासों को भी नुकसान पहुंच रहा था।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चकबंदी लेखपालों को 8 साल बाद प्रमोशन का निर्णय लिया है।
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के प्रतीक्षारत चकबंदी लेखपालों को पदोन्नति दी है। प्रदेश के 68 जिलों के 728 चकबंदी लेखपालों को चकबंदीकर्ता (कानूनगो) के पद पर प्रमोट किया है। सीएम योगी का यह महत्वपूर्ण कदम न सिर्फ अधिकारियों के करियर में एक नया अध्याय जोड़ेगा, बल्कि प्रदेश के किसानों के भूमि संबंधी विवादों के निपटारे में भी तेजी आएगी। इससे राज्य का कृषि क्षेत्र समृद्ध होगा और किसानों के जीवन में खुशहाली आएगी।
इस पर सुल्तानपुर जिले के कादीपुर तहसील के लेखपालों ने अपना नाम गोपनीय रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नजरिया न्यूज के माध्यम से बताया कि चकबंदी के दौरान ग्राम पंचायत भूमि समिति के सलाह से किसानों की कृषि योग्य भूमि की कटौती की जाती है। यह कटौती चकरोड , नाली आदि के लिए की जाती है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत से लगभग करोड़ रुपये मूल्य की भूमि इससे कम हो जाती है। इसके बावजूद गरीब किसानों को घर से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए चकरोड नहीं मुहैया कराया जाता।
एक सवाल पर लेखपालों ने बताया कि चालाक काश्तकार आबादी के बीच स्थित कृषि योग्य भूमि को चक योग्य भूमि में शामिल नहीं होने देते। आबादी के बीच स्थित कृषि भूमि चक आउट कर देने से चकबंदी विभाग का अधिकार उस भूमि पर नहीं रहता। इस प्रकार गरीब किसान को उनके घर से मुख्य सड़क तक चकरोड नहीं मिल पाता।
चकबंदी लेखपाल के हवाले से कादीपुर तहसील के ग्राम पंचायत पाकरपुर के किसानो ने बताया कि रामपाल मौर्य आदि किसान हैं। इनके दरवाजे पर कृषि भूमि को चक आउट कर दिया गया है। जिसके चलते मुख्य सड़क तक चकरोड के लिए भूमि आरक्षित नहीं की गई है। रामपाल मौर्य के दरवाजे पर स्थित भानु प्रताप सिंह की भूमि पर मालियत लगाकर 100मीटर चकरोड चकबंदी कानून आरक्षित देता है तो सड़क तक किसानों की पहुंच संभव हो जाएगी। फिलहाल रास्ते को रोकने में चकबंदी विभाग और दबंग काश्तकार का खेल बताया जा रहा है।
इसी प्रकार मुख्य सड़क से
(हसरोंनागनपुर से कन्या प्राथमिक पाठशाला पाकरपुर)
समरसेन सिंह आदि दर्जनों परिवावरों के घर तक मुख्य सड़क से कन्या प्राइमरी पाठशाला होते हुए ग्राम पंचायत द्वारा सड़क बनाई गई है।
उल्लेखनीय है कि यह सड़क लगभग 100मीटर चक आउट में स्थित है। कानून गो चकबंदी पाकरपुर के द्वारा भानु प्रताप सिंह के दरवाजे पर उक्त सड़क को सर्वे के दौरान नहीं दर्ज किया गया।
इस प्रकार उक्त सड़क का अस्तित्व कागज में नहीं है। चकबंदी विभाग को मुख्य सड़क से मुख्य आबादी तक वाया कन्या प्राथमिकी पाठशाला पाकरपुर से होते हुए चक आउट भूमि में कानून गो चकबंदी को दर्ज कररना चाहिए।
ऐसा नहीं करना और अधिकारियों का चुप रहना विवाद को जन्म दिया है।
पाकरपुर के काश्तकार राजेंद्र प्रसाद सिंह आदि ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार खाते की भूमि में सहखातेदारों को पैतृक संपत्ति में बराबर का हिस्सा है। वहीं
ग्राम पंचायत पाकरपुर में कानून गो और एसीओ ने कब्जा के अनुसार पैतृक भूमि में हिस्सा दिया है। इस मनमानी के चलते गरीब खातेदारों के हिस्से की भूमि संपन्न सहखातेदारों का कब्जा बताकर उनके नाम सीओ और कानून गो ने कर दिया है।
दुर्केश बहादुर सिंह
काश्तकार, ग्राम पाकरपुर, तहसील कादीपुर, जिला सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश
काश्तकार हरिकेश सिंह सुत रामनरेश सिंह और वरिष्ठ पत्रकार दुर्केश सिंह सुत रामनरेश सिंह तथा राजेंद्र सिंह सुत अभयराज सिंह की पैतृक भूमि बड़े किसानों का कब्जा बताकर उनके नाम से चक काट दिया गया है। मुकदम की सुनवाई नहीं हो रही है। असंतुष्ट किसान हाईकोर्ट का दर्जा खटखटाया तो पाकरपुर की चकबंदी फिर बाधित हो जाएगी। लगता है चकबंदी विभाग नहीं चाहता है कि किसानों का कल्याण हो।
*कोट*
एक दर्जन से अधिक खातों का नाम लिखकर सीओ न्यायालय में दिया हूं। इन खातों में दर्ज कई गाटा मेरा है। उस पर मेरा कब्जा भी है। लेकिन दबंग किसानों के खाते में मनमानी करते हुए गाटों को ईमर्ज कर दिया गया है। जैसे 1932गाटा संख्या मेरा है। इस पर दूसरे काश्तकार का कब्जा बताकर उसे आधे का हिस्सेदार बना दिया गया है। गाटा 3940 चकआउट है। मौके पर एक एकड़ है। यह गाटा संख्या चक आउट है। इसके बावजूद एसीओ के एक मनमानी आदेश से इसका क्षेत्रफल 140 विश्वा कम कर दिया गया है। इसी प्रकार अन्य अनियमितताएं की गई हैं। मुकदमा महीने पहले सीओ न्यायालय किया गया है। संपूर्ण समाधान दिवस में आवेदन दिया गया है। कानून रिपोर्ट नहीं लगा रहा है।























