- अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी (एसडीपीओ) राजेश कुमार राम ने 27 साल पूर्व मारपीट कर बाउंड्री वाल को तोड़कर क्षति ग्रस्त करने का मामला प्रमाणित हुआ है।
नजरिया न्यूज़। विवेक प्रकाश (अधिवक्ता सह पत्रकार)। न्यायमण्डल अररिया के फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आशीष आनन्द ने सभी 13 दोषियों को भरी अदालत में दोबारा गलती न हो, ऐसी हिदायत देकर डॉट फटकार लगाते हुए छोड़ दिया है। बताया जाता है कि 27 साल पूर्व मारपीट कर बाउंड्री वाल को तोड़कर क्षति ग्रस्त करने का मामला प्रमाणित हुआ है।
यह आदेश जीआर 2002/1997 फारबिसगंज थाना कांड संख्या 340/97 मे सुनाया गया है।
सज़ा पाने वालों में फारबिसगंज भट्टाबाड़ी के रहनेवाले 45 वर्षीय पंचम देवी, 57 वर्षीय समरेन्द्र देवी, 61 वर्षीय परमानंद कुँवर, 45 वर्षिय प्रदीप देव, 58 वर्षीय धर्मनाथ झा, 60 वर्षीय चंद्रशेखर देव, 40 वर्षीय पिन्टू झा, 35 वर्षीय निकुल देवी, 55 वर्षीय शशिकांत देवी, 55 वर्षीय गंगा नंद झा, 40 वर्षीय सीताराम झा, 52 वर्षीय विनोद झा, 42 वर्षीय मिश्री लाल झा शामिल है।
इस संबंध में सरकार की ओर से अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी (एसडीपीओ) राजेश कुमार राम ने बताया कि घटना 15 नवंबर 1997 की सुबह 09 बजे दिन की है। फारबिसगंज थाना क्षेत्र के भट्टाबाड़ी मे सभी आरोपी एकजुट होकर नाजायज मजमा बनाकर लोहे की खंती व कुदाल से लैस होकर सूचक अमरनाथ देव के अहाते में घुसकर उन्हें तथा उनके पिता विश्वनाथ प्रसाद देव के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिये थे। इतना ही नही, सभी आरोपी मिलकर सूचक अमरनाथ देव के बाउंड्री वाल तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिये तथा बचाने आये बालेश्वर रॉय एवं हंसनाथ तिवारी को भी मारपीट किये थे।
घटना को लेकर अमरनाथ देव ने सभी आरोपियों के विरुद्ध फारबिसगंज थाना कांड संख्या 340/1997 दर्ज कराया।
अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी (एसडीपीओ) राजेश कुमार राम ने बताया कि इस मामले में आइओ द्वारा 04 फरबरी 1998 को सभी अभियुक्तों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर दिया गया था। संज्ञान पश्चात 19 मई 1999को चार्जफ्रेम (आरोप गठन) किया गया था, जिसमे सभी आरोपियों ने घटना कारित करने से इनकार किया था। इसके बाद 07 सितंबर वर्ष 2000 ई से यह मुकदमा गवाही के लिए प्रारंभ किया गया था। जहाँ सरकार की ओर से प्रस्तुत सभी गवाहो ने घटना का पूर्ण समर्थन किया था। गवाहो के बयान से संतुष्ट होकर न्यायालय के न्यायधीश आशीष आनन्द ने भादवि की धारा 147, 447, 323 के तहत सभी आरोपियों को दोषी पाया। सज़ा के बिन्दू पर वचाब पक्ष के अधिवक्ता अमर कुमार सिन्हा व मृत्युंजय कुमार सिन्हा ने पहली गलती के तहत माफी देने की गुहार लगायी। न्यायालय के न्यायधीश ने दोनो पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी आरोपियों को ऑफन्दर एक्ट की धारा 03 का लाभ देते हुए दुबारा ऐसी गलती न हो, हिदायत देते हुए डॉट फटकार लगाते हुए छोड़ दिया।





















