नजरिया न्यूज अररिया। एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जिसमें पत्रकार साधन यादव के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा जोगबनी के भाजपा युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष घनश्याम कुमार राम के दुवारा 26 सितंबर 2024 को दिए आवेदन को बथनाहा थाना में दर्ज किया गया, लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह है कि बिना किसी जांच-पड़ताल के ही इस मामले को तुरंत दर्ज कर लिया गया। बथनाहा थाना अध्यक्ष ने आनन-फानन में यह कार्रवाई की, जो कई सवाल खड़े करती है।
यह घटना पत्रकारिता और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है। रिश्वत लेना और देना, दोनों ही बड़े अपराध हैं, लेकिन सवाल उठता है कि पत्रकार पर इतनी जल्दबाजी क्यों? क्या इसके पीछे कोई दबाव था, या फिर किसी और वजह से थाना अध्यक्ष ने यह कदम उठाया?
पत्रकार साधन यादव ने 23 सितंबर 2024 को बथनाहा थाना में नगर परिषद जोगबनी के अध्यक्ष पति सह भाजपा नेता रोहित यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इ
स शिकायत में यादव पर मारपीट, जबरन स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कराने, धर्म के अपमान, और शराब एवं कोरेक्स को शरीर पर बांधकर फोटो खींचने का आरोप था। यह एक गंभीर मामला था, लेकिन बथनाहा थाना अध्यक्ष ने इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। सवाल उठता है कि पुलिस आखिर पत्रकार से किस प्रकार की दुश्मनी रखती है?
बिना जांच के पत्रकार पर मुकदमा क्यों?
बथनाहा थाना अध्यक्ष पर आरोप है कि उन्होंने (सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार) बिना किसी वरीय अधिकारी को जानकारी दिए और बिना जांच के पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। सूत्रों के अनुसार, यह कदम किसी नेता के दबाव में उठाया गया। अररिया के आरक्षी अधीक्षक का कहना है कि किसी भी नेता या पत्रकार पर बिना जांच के मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए। फिर भी, पत्रकार के खिलाफ यह कार्रवाई की गई, जो पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
पुलिस की कार्रवाई में दोहरे मापदंड :
अररिया में यह कोई नई बात नहीं है कि पुलिस की कार्रवाई केवल पत्रकारों पर ही त्वरित होती है, जबकि असली अपराधियों पर अक्सर देरी होती है। पुलिस कब उन लोगों पर कार्रवाई करेगी जो रिश्वत देने में शामिल होते हैं? रिश्वत लेना अगर अपराध है, तो रिश्वत देना भी उतना ही बड़ा अपराध है। ऐसे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
अररिया में पुलिस द्वारा आम जनता के मामलों में देरी भी एक सामान्य समस्या है। चाहे वह किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार का मामला हो, चोरी की शिकायत हो, या जमीन विवाद, आम लोगों के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराना मुश्किल होता है। क्या पत्रकार का काम सच्चाई उजागर करना नहीं है? क्या पुलिस और खनन माफिया की मिलीभगत को उजागर करना गलत है?
पुलिस पर उठते सवाल:
अररिया में पुलिस द्वारा पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही में अनदेखी के कई मामले सामने आए हैं। रानीगंज में पत्रकार विमल मंडल की हत्या, पत्रकारों को गोली मारने की धमकी पर देरी से मामला दर्ज करना, और मदनपुर में पत्रकार को मिली धमकी पर देर से कार्रवाई जैसे उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि पुलिस पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है।
आरक्षी अधीक्षक का बयान :
पत्रकार साधन यादव ने 21 सितंबर को अररिया के आरक्षी अधीक्षक अमित रंजन को भी आवेदन दिया, लेकिन इसके बावजूद किसी भी थाना में उनका मामला दर्ज नहीं हुआ। जब इस मामले पर आरक्षी अधीक्षक से सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि फारबिसगंज अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को इस मामले की जांच का आदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस मामले में उचित कार्रवाई होगी और दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।
आरक्षी अधीक्षक ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि पत्रकार या नेता पर जल्दबाजी में कोई मामला दर्ज नहीं होना चाहिए। उन्होंने माना कि अगर पत्रकार पर कोई मामला दर्ज हुआ है, तो उसकी गहन जांच की जाएगी। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि घूस देना और लेना दोनों ही अपराध हैं, और दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।






















