नजरिया न्यूज रानीगंज। आरटीपीएस काउंटर से जुड़ा एक वायरल वीडियो जिले में हंगामे का कारण बन गया है। वीडियो में एक व्यक्ति पर आरटीपीएस कर्मी से पैसे के लेन-देन का आरोप लगाया जा रहा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। इस मामले को लेकर राजद नेता मयंक पासवान ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को एक आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है।
वीडियो की सत्यता पर सवाल :
वीडियो की जांच में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए हैं। वीडियो में एक व्यक्ति शर्ट की जेब से कुछ निकालते हुए दिख रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह पैसे ही हैं। वीडियो केवल एक पक्ष से दिखाया गया है, जबकि दूसरी ओर कौन है, यह बिलकुल स्पष्ट नहीं है।
राजद नेता मयंक पासवान ने यह वीडियो आधार बनाकर आरटीपीएस कर्मी शिल्पा गुप्ता के खिलाफ एक महीने बाद शिकायत की। सवाल यह उठता है कि अगर वीडियो सही था, तो मयंक पासवान ने इसे तुरंत क्यों नहीं उठाया? क्या कोई व्यक्तिगत स्वार्थ इसमें शामिल था? यह बात जांच का विषय है। सूत्रों के अनुसार, मयंक पासवान प्रखंड परिसर में 20 बार फोन के माध्यम से बुलाए जाने के बावजूद बयान देने से बचते रहे और उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता का आरोप
रानीगंज के सामाजिक कार्यकर्ता, बिरेंद्र मंडल ने मयंक पासवान के खिलाफ एक आवेदन थाना रानीगंज में दिया है। उनकी शिकायत के अनुसार, 4 सितंबर 2024 को आरटीपीएस काउंटर परिसर में मयंक पासवान ने उनके साथ बदसलूकी की और उनका वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी। बिरेंद्र मंडल का कहना है कि मामला बाद में सुलझा लिया गया था, लेकिन कुछ दिन बाद ही यह वीडियो वायरल हो गया और मयंक पासवान ने शिल्पा गुप्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी।
पंचायत समिति सदस्य की सफाई :
वायरल वीडियो में दिखने वाले व्यक्ति, जो कि पंचायत समिति के सदस्य हैं, ने भी प्रखंड विकास पदाधिकारी को एक आवेदन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आरटीपीएस कर्मी शिल्पा गुप्ता को कोई पैसा नहीं दे रहे थे और उन्हें इस मामले में जानबूझकर फंसाया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि यह वीडियो सच्चाई से परे है और इसमें उन्हें बदनाम करने की साजिश हो सकती है।
पुरानी रंजिश की ओर संकेत?
सूत्रों के अनुसार, 2016 में नरपतगंज आरटीपीएस के एक कर्मी को जिला पदाधिकारी द्वारा महिला कर्मी के साथ गलत व्यवहार करने के कारण निलंबित किया गया था। माना जा रहा है कि इस निलंबित कर्मी द्वारा ही मयंक पासवान को इस्तेमाल कर शिल्पा गुप्ता को भी निलंबित करवाने की साजिश रची जा रही है। इस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं यह मामला पुरानी रंजिश का परिणाम तो नहीं है।
प्रखंड विकास पदाधिकारी का बयान
प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि उन्होंने इस मामले की सूचना जिला प्रशासन को दी है और आरटीपीएस कर्मी के तबादले की सिफारिश की है। जब उनसे वीडियो पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि वीडियो में कुछ भी स्पष्ट नहीं है, और इस आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने ऑन कैमरा बयान देने से भी मना कर दिया।
निष्पक्ष जांच की मांग :
इस मामले में कई सवाल उठते हैं। वायरल वीडियो में स्पष्ट साक्ष्य की कमी है, और इसके आधार पर जल्दबाजी में कोई निर्णय लेना गलत हो सकता है। जिला और प्रखंड प्रशासन को निष्पक्ष और गहराई से जांच करनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि यह साजिश है या सच्चाई। इस मामले की सही जांच से ही निर्दोषों को न्याय मिलेगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।
निष्कर्ष:
इस पूरे प्रकरण में आरटीपीएस कर्मी शिल्पा गुप्ता और वीडियो में दिखने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन बिना ठोस सबूत के किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। प्रशासन को वीडियो की जांच में जो भी दोषी पाए जाए, चाहे वह आरटीपीएस कर्मी हो या अन्य, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।























