नजरिया न्यूज बिहार डेस्क : नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे रूप मां कुष्मांडा की पूजा का विशेष महत्व है। मां कुष्मांडा 8 भुजाओं वाली दिव्य शक्ति हैं, जो अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थीं। मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में चारों तरफ अंधियारा था और मां ने अपनी हल्की हंसी से पूरे ब्रह्मांड को रच डाला। सूरज की तपिश को सहने की शक्ति मां के अंदर है।
मां कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख, सौभाग्य और बुद्धि की प्राप्ति होती है। देवी पुराण के अनुसार, पढ़ने वाले छात्रों को मां कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए। मां दुर्गा उनकी बुद्धि का विकास करने में सहायक होती हैं।

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद पूजा की तैयारी करनी चाहिए और मां कुष्मांडा का व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए। पूजा के स्थान को गंगाजल से पवित्र करना चाहिए। लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
इसके बाद मां कुष्मांडा का स्मरण करें और पूजा में पीले वस्त्र, फूल, फल, मिठाई, धूप, दीप, नैवेद्य, अक्षत आदि अर्पित करें। सारी सामग्री अर्पित करने के बाद मां की आरती करें और भोग लगाएं। मां कुष्मांडा को भोग में मालपुआ और बताशे चढ़ाने चाहिए। पीले रंग का केसर वाला पेठा रखना चाहिए और उसी का भोग लगाएं।
अंत में क्षमा याचना करें और ध्यान लगाकर दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें। मां कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को जीवन शक्ति प्रदान करने वाला माना गया है।
























