- दारोगा मानवी को तानों से तंग होकर छोड़ना पड़ था घर
- कहा-10 साल बाद वर्दी पहने हुए जाऊंगी गांव
- पटना के गांधी मैदान दौड़ने जाती थी मधु
- दरोगा की फिजिकल टेस्ट में 8 मिनट के अंदर दौड़ पूरी कर टास्क पूरा कर लिया
*वीरेंद्र चौहान, विशेष संवाददाता नजरिया न्यूज, 10जुलाई।*
बिहार में BPSSC का रिजल्ट जारी हो चुका है। इस परीक्षा में 1275 अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट में शामिल थे।दरअसल इस बार अभ्यर्थियों के सलेक्शन के लिए 842 पुरुष 450 महिलाएं और 5 सीट ट्रांसजेंडर के लिए आरक्षित की गई थी। 5 सीट में तीन सीट को ट्रांसजेंडर अपने नाम कर लिए हैं।
*मानवी बनी देश की पहली ट्रांसजेंडर दरोगा:*
मानवी मधु कश्यप को ट्रांसजेंडर दरोगा के पद के लिए नियुक्त किया गया है।. बता दें कि मानवी मधु कश्यप बिहार के भागलपुर के रहने वाली हैं। मधु के पिता इस दुनिया में नहीं है, जिस कारण उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ा हैं।
*ताने से परेशान हो घर से भाग निकली थी मानवी:*
मानवी मधु कश्यप ने बताया कि ट्रांसजेंडर होने के कारण उन्हें लोगों के ताने और गाली सुनने पड़े हैं।दरोगा के पद को हासिल करने का दौर उनके लिए बहुत मुश्किल था।मधु बताती हैं कि दरोगा बनने का सपना मेरे लिए आसान नहीं था।यह सफर बहुत ही मुश्किल था:
जब पिता का देहांत हुआ था तब वह लोगों के ताने से परेशान हो कर अपना घर छोड़ने का फैसला ली थी औल घर त्याग दिया।
10 साल बाद वर्दी पहने हुए घर जाऊंगी।
*दारोगा मधु ने कहा:*
एक ट्रांसजेंडर के लिए यहां तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल सफर है। उसके लिए भी यह एक मुश्किल काम था। मेहनत के दम पर सपना पूरा हुआ। समाज को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हुई। मधु ने बताया उनके परिवार में मां, दो बहन, और एक भाई है। मधु पिछले 10 सालों से अपने घर नहीं गई है।
*मधु ने कहा:*
अब वर्दी पहनकर अपने घर वापस जाऊंगी। इसका सारा श्रेय हमारे गुरु जी को है। उन्हीं की शिक्षा से आज मैं यहां तक पहुंची हूं।
*कोचिंग सेंटर में नही मिल रहा था मधु को एडमिशन :*
मधु ने एक और खुद पर बीती दर्द भरी कहानी बताई:
जब वह दरोगा बनने का सपना देख रही थी। तब कई कोचिंग सेंटर को रुख किया लेकिन कोचिंग सेंटर में एडमिशन नहीं हो पा रहा था। सभी लोग उसे एडमिशन देने से मना कर रहे थे। उसके बाद गुरु रहमान ने मुझे और मेरे दोस्तों को हिम्मत दी। आज मैं यहां हूं।
*हर दिन 8 घंटे करती थी पढ़ाई :*
मधु बताती है कि वह हर दिन 8 घंटे पढ़ाई करती और हर दिन पटना के गांधी मैदान दौड़ने जाती थी।और आज इसी मेहनत का नतीजा है कि उसने दरोगा की फिजिकल टेस्ट में 8 मिनट के अंदर दौड़ पूरी कर यह टास्क पूरा कर लिया।























