- जीत दिलाने पर भी मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्री बदल दिए गए
- क्या हारने या जीतने पर भी कुर्सी को खतरा रहता है- भाजपा कर रही यूपी की समीक्षा
- बड़े-बड़े पत्रकार इसे अगला प्रधानमंत्री भाजपा से कौन बनेगा की लड़ाई के तौर पर देख रहे हैं
- हार की समीक्षा में शीत युद्ध देख रहे हैं -अन्यथा टिकट बांटने में जिसकी चली वह ही हार के लिए है जिम्मेवार
*दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 12जुलाई।*
उत्तर प्रदेश के मतदाताओं की मानसिक स्थिति की भाजपा समीक्षा कर रही है। इसे लेकर पत्रकारों में विमर्श जारी है। मतदाताओं की मानें तो इसके लिए केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेवार हैं। वहीं केंद्र सरकार का पक्ष लेने वाले पत्रकारों का कहना है यदि केंद्र सरकार की नीतियों भाजपा की हार के लिए उत्तर प्रदेश में जिम्मेवार हैं तो मध्यप्रदेश में 100प्रतिशत सीट भाजपा को क्यों मिलीं।
*वहीं वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह ने कहा:*
उत्थान के बाद पतन प्रकृति का न्याय है। उत्तर प्रदेश में भाजपा विकास के चरम पर पहुंच चुकी है। राजनीतिक विष्लेषकों का कहना है कि देश इस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री के तौर पर उतर प्रदेश देख रहा है। भाजपा के एक-दो बड़े नेता इसे पचा नहीं पा रहे हैं। इसी का जवाब उत्तर प्रदेश से भाजपा को मिला है।
पत्रकारों का यह भी कहना है कि हार की समीक्षा की रिपोर्ट पोस्टमार्टम के नतीजों की तरह आएगा।
अर्थात बड़े डॉक्टर जैसा चाहेंगे, वैसा परिणाम उत्तर प्रदेश की समीक्षा रिपोर्ट में भाजपा को दिखेगा। यह भी विमर्श का विषय बना हुआ है कि क्या हार और जीत को भाजपा एक ही नज़र से देखती है। मध्यप्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्री क्यों बदले गए।























