- 2018 के लोकसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार प्रदीप सिंह को4,47,346 मत और राजद के सरफराज आलम को मिला था 5,09334 वोट
- लोकसभा चुनाव 2019 में हिंदू मतों का ध्रुवीकरण होने से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप सिंह को 6,18,434 मत और राजद के सरफराज आलम को4,81,193मत मिला।
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज। बिहार प्रदेश में अररिया लोकसभा के मुसलमान बुद्धिजीवियों का मानना है कि हिंदू मतों का ध्रुवीकरण नहीं होगा। सभी लोग गोलबंद होकर संकल्प पत्र और न्यायपत्र में से एक का चुनाव करेंगे।
बिहार के सीमांचल में मुस्लिम बहुल इलाक़ों में ख़ामोशी व्याप्त है। एक-दो बुद्धिजीवियों ने बातचीत की।
साल 2019 में हिंदू मतों के ध्रुवीकरण के माहौल में अररिया लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप सिंह को विजय मिली थी । इससे बिहार के कद्दावर नेता तस्लीमुद्दीन के निधन से 20218 में उपचुनाव हुआ था जिसमें राजद उम्मीदवार सरफराज की जीत मिली थी।
लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को कड़ी चुनौती मिल रही है।
इंडिया गठबंधन की तरफ से कद्दावर नेता और हिंदू और मुसलमानों में गहरी पैठ रखने वाले स्वर्गीय तस्लीमुद्दीन के पुत्र और जोकीहाट से विधायक शाहनवाज आलम ने मुकाबला दिलचस्प बना दिया है।
राजद, कांग्रेस और कंम्युनिष्ट के साथ ‘इंडिया’ गठबंधन उम्मीदवार पर सरफराज आलम पर सभी की नजर है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नए बदले समीकरणों में अररिया से इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार की जीत होगी।
अररिया जिला मुख्यालय से क़रीब 40 किलोमीटर दूर नरपतगंज में भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा सांसद प्रदीप सिंह, भाजपा का संकल्प पत्र, इंडिया गठबंधन का न्याय पत्र और इंडिया गठबंधन उम्मीदवार शाहनवाज आलम के बीच में बातचीत करने पर निष्पक्ष मतदाताओं का रुझान इंडिया गठबंधन की तरफ दिखाई दिया। सिकटी और जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में भी निष्पक्ष मतदाताओं ने इंडिया गठबंधन के न्यायपत्र को समाज के हित में बताया।
दानिश अली मानते हैं कि भाजपा की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति पर इंडिया गठबंधन की मोहब्बत की राजनीति 2024में हावी रहेगी।
दानिश अली कहते हैं, “संसद में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व लगातार घटता जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ सालों में ऐसा माहौल बनाया गया है कि जहां कोई मुसलमान प्रत्याशी होता है वहां सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने की साज़िश की जाती है।
दानिश अली कहते हैं, “ये एक बड़ा सवाल है कि देश की एक बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व लगातार घट रहा है। बीजेपी नारा देती है कि ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ लेकिन असल में इसका मतलब है ‘विपक्ष मुक्त भारत’ और ‘मुस्लिम मुक्त’ विधायिका।
दानिश अली कहते हैं इंडिया गठबंधन संजीदगी चुनाव लड़ रहा हैं।दानिश अली कहते हैं, “जो पीड़ित, वंचित, शोषित और हाशिए पर खड़ा समाज है उसका प्रतिनिधित्व लोकसभा में इंडिया गठबंधन ने करने की घोषणा की है। इंडिया गठबंधन के मुद्दे बड़े हैं। इंडिया गठबंधन ठेके की नौकरी समाप्त करेगी। प्रत्येक गरीब महिला को एक लाख रुपये प्रति वर्ष देगी। 30 लाख सरकारी नौकरी सरकार बनते ही देगी। सरकारी नौकरी देने के लिए 70लाख नये पद सृजित करेगी। सरकारी स्कूलों की रसोइयां, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका तथा आशा का मानदेय दोगुना कर देगी। वहीं भाजपा के संकल्प पत्र में सारी बातें गोल- गोल हैं।
इसलिए भाजपा उम्मीदवार को भाजपा के कार्य पर वोट नहीं मिलेगा। एकजुट विपक्ष भाजपा भारी पड़ रहा है। अधिकांश भाजपाई भी मानते हैं कि इंडिया गठबंधन का न्याय पत्र मोदी के संकल्प पत्र से अच्छा है।
उल्लेखनीय है कि 2018 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार प्रदीप सिंह को4,47,346 मत और राजद के सरफराज आलम को 5,09334वोट मिले थे। वहीं लोकसभा चुनाव 2019 में हिंदू मतों का ध्रुवीकरण होने से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप सिंह को 6,18,434 मत और राजद के सरफराज आलम को4,81,193मत मिले थे।























