प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों को राहत पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में बुधवार को जिला कृषि पदाधिकारी सह सहायक निदेशक हरिद्वार प्रसाद चौरसिया ने धमदाहा प्रखंड की इटहरी पंचायत के प्रियंकर ग्राम का दौरा किया और रबी सीजन 2025-26 में हुई फसल क्षति के बाद कृषि इनपुट अनुदान हेतु प्राप्त आवेदनों का स्थलीय भौतिक सत्यापन किया।
ज्ञात हो कि मार्च 2026 के तीसरे और चौथे सप्ताह में हुई असामयिक वर्षा, तेज आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने जिले की रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद किसानों ने सरकारी पोर्टल पर मुआवजे के लिए आवेदन किया था। इन आवेदनों की वास्तविकता परखने के लिए जिला कृषि पदाधिकारी स्वयं खेतों में पहुंचे और प्रभावित फसलों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत कर नुकसान की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान जिला कृषि पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने प्रखंड कृषि पदाधिकारी, कृषि समन्वयकों तथा एटीएम/बीटीएम को स्पष्ट रूप से कहा कि सत्यापन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पोर्टल पर प्राप्त सभी आवेदनों की जांच प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरी की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। केवल उन्हीं किसानों के आवेदन स्वीकृत किए जाएं जिनकी फसलों को वास्तव में नुकसान पहुंचा है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अपात्र व्यक्ति को गलत तरीके से सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलना चाहिए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया कि एक भी वास्तविक पीड़ित किसान सहायता से वंचित न रह जाए।
जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि आवेदनों की सूक्ष्म जांच के बाद उन्हें तुरंत स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाए, ताकि मुआवजे की राशि बिना देरी के सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा सके। इससे किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी और वे अपनी अगली फसल की तैयारी कर पाएंगे।
जिला प्रशासन की इस सक्रिय पहल से प्रभावित किसानों के बीच उम्मीद की किरण जगी है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर मुआवजा मिल जाता है तो उन्हें आर्थिक संकट से उबरने में काफी मदद मिलेगी। निरीक्षण के दौरान कृषि विभाग के कई अधिकारी, कर्मी और स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद रहे।
विभाग का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द सर्वेक्षण कार्य पूरा कर सभी पात्र किसानों को राहत राशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई कुछ हद तक संभव हो सके।






















