23 अप्रैल 2026 को जोगसर थाना पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर हिरासत में लिए गए पत्रकारों के मामले में रविवार को भागलपुर में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। घंटाघर स्थित एक विवाह भवन में आयोजित इस प्रेस वार्ता में अधिवक्ता आलय बनर्जी, हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमोद कुमार (राय) सहित वरिष्ठ पत्रकार गौतम सुमन गर्जना, अजय कुमार यादव, संजीव मिश्रा, अरविंद कुमार यादव और मोहम्मद समीउल्लाह मौजूद रहे।
प्रेस वार्ता में अधिवक्ता आलय बनर्जी ने आरोप लगाया कि शहर के एक रेस्टोरेंट में चल रहे कथित अनैतिक गतिविधियों का स्टिंग ऑपरेशन कर रहे पत्रकारों के साक्ष्यों को दबाने का प्रयास जोगसर थाना प्रभारी द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि बिना ठोस आधार के पत्रकारों पर प्राथमिकी दर्ज की गई, जबकि मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, भागलपुर ने जांच के बाद सभी को साधारण मुचलके पर रिहा कर दिया।
हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमोद राय ने भी जोगसर थाना प्रभारी और रेस्टोरेंट संचालक के बीच कथित गठजोड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि साजिश के तहत पत्रकारों को फंसाया गया है। उन्होंने इसे पत्रकारों की छवि धूमिल करने का प्रयास बताया।
वरिष्ठ पत्रकार गौतम सुमन गर्जना ने कहा कि पुलिस प्रशासन पर उनका भरोसा इस घटना से टूट गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना जांच के उन्हें “फर्जी पत्रकार” बताया गया, जबकि उनके पास वैध पहचान और आरएनआई पंजीकृत संस्थान से जुड़ाव है। उन्होंने मुख्यमंत्री सहित उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की।
पत्रकार अरविंद कुमार यादव ने बताया कि स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रेस्टोरेंट में आपत्तिजनक गतिविधियों के साक्ष्य मिले थे, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय पत्रकारों पर ही रंगदारी और वसूली का आरोप लगा दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में साजिश के तहत उन्हें फंसाया गया है।
अन्य पत्रकारों ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच होती, तो शहर में चल रहे कई ऐसे मामलों का खुलासा हो सकता था। सभी ने एक स्वर में उच्चस्तरीय जांच की मांग की, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो।






















