नजरिया न्यूज़, अररिया।
जिले में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर प्रशासन सक्रिय है और इस दिशा में बचाए गए बच्चों के पुनर्वास हेतु तत्काल आर्थिक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। यह सहायता राशि ₹3000 होती है, जिसे बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को तुरंत प्रदान किया जाता है। प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट किया गया है कि यह किसी प्रकार की मजदूरी या वेतन नहीं है, बल्कि रेस्क्यू के बाद दी जाने वाली प्रारंभिक सहायता है, जिससे बच्चे की तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सके।
यह सहायता श्रम विभाग एवं जिला श्रम अधीक्षक के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। पूरी प्रक्रिया के तहत गठित धावा दल या टास्क फोर्स द्वारा संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी कर बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जाता है। रेस्क्यू के बाद मौके पर ही श्रम अधीक्षक द्वारा ₹3000 की सहायता राशि प्रदान की जाती है, जिससे बच्चे को तत्काल राहत मिल सके।
इसके उपरांत बच्चे को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जहां उसकी काउंसलिंग, देखभाल एवं आगे की पुनर्वास प्रक्रिया सुनिश्चित की जाती है। प्रशासन का उद्देश्य केवल बाल श्रम से मुक्ति दिलाना ही नहीं, बल्कि बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर करना भी है।
इस सहायता के लिए कुछ निर्धारित शर्तें भी हैं। इसमें 14 वर्ष से कम आयु के बाल श्रमिक या 14 से 18 वर्ष के किशोर श्रमिक शामिल होते हैं, जिन्हें श्रम विभाग, पुलिस या अधिकृत संस्था द्वारा बाल श्रम से मुक्त कराया गया हो।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि बाल श्रम जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाएं और किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना संबंधित विभाग को दें, ताकि समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।





















