नजरिया न्यूज़, अररिया।
महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ की स्मृति में आयोजित ‘रेणु महोत्सव 2026’ के अंतर्गत गुरुवार को अररिया के टाउन हॉल में भव्य साहित्य परिचर्चा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन अररिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ जिला प्रशासन के वरीय अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महान साहित्यकार रेणु जी की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा साहित्यिक संवाद को प्रोत्साहित करना था।
उद्घाटन सत्र में जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर मुख्य रूप से कोषागार पदाधिकारी, जिला संस्कृति पदाधिकारी सहित अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि रेणु जी के सुपुत्र दक्षिणेश्वर प्रसाद राय की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। उपस्थित अधिकारियों और साहित्य प्रेमियों ने रेणु जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उनके साहित्यिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की।
शाम 5:20 बजे से आरंभ हुए इस सम्मेलन में देश के ख्यातिप्राप्त कवियों और रचनाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर प्रसिद्ध हास्य एवं व्यंग्य कवि दिनेश बावरा ने अपनी व्यंग्यात्मक रचनाओं से लोगों को खूब हंसाया, वहीं प्रख्यात कवयित्री तिष्याश्री ने अपनी संवेदनशील कविताओं से श्रोताओं के दिलों को छू लिया। युवा रचनाकार अमरदीप कुमार ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से नई पीढ़ी की सोच और संवेदनाओं को मंच पर प्रस्तुत किया।
साहित्य परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ ने अपने लेखन के माध्यम से ग्रामीण जीवन, आंचलिक संस्कृति और आम जनमानस की पीड़ा व संवेदनाओं को साहित्य में विशेष स्थान दिलाया। उनकी रचनाएं आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से साहित्य के प्रति लोगों की रुचि बढ़ती है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
टाउन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के साहित्य प्रेमियों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने कवियों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया और रेणु जी की स्मृतियों को नमन किया। आयोजकों ने कहा कि रेणु महोत्सव के माध्यम से जिले में साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।






















