अंतरराष्ट्रीय कामकाजी महिला दिवस के अवसर पर रविवार को जन जागरण शक्ति संगठन (JJSS) के तत्वावधान में अररिया में ‘औरत आज़ादी मार्च’ का आयोजन किया गया। अररिया बस स्टैंड से चांदनी चौक तक निकाले गए इस मार्च में सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं, मजदूरों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रतिभागियों ने महिलाओं के अधिकार, समानता, न्याय और विश्व शांति के समर्थन में जोरदार नारे लगाए।
मार्च का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ दुनिया भर में जारी युद्ध, बढ़ती बेरोजगारी और साम्राज्यवादी हमलों के खिलाफ आवाज बुलंद करना था। जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए चांदनी चौक पहुंचा, जहां यह एक नुक्कड़ सभा में तब्दील हो गया।
सभा को संबोधित करते हुए संगठन की सचिव सोहिनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह उन ऐतिहासिक संघर्षों को याद करने का अवसर है जब महिलाओं ने अपने अधिकारों और सम्मान के लिए आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क की कपड़ा मिल की मजदूर महिलाओं और रूस की क्रांतिकारी महिलाओं ने ‘रोटी और शांति’ के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया था। उसी विरासत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता आज भी बनी हुई है।
संगठन की वरिष्ठ सदस्य मांडवी देवी ने कहा कि युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियों में सबसे अधिक पीड़ा महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में जारी संघर्षों के कारण महिलाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाती है। ऐसे में समाज को शांति, समानता और न्याय के मार्ग पर आगे बढ़ने की जरूरत है।
कार्यक्रम की शुरुआत जीवनशाला के बच्चों—अतीश, नंदिनी, अंशु और ज्ञांशा—द्वारा प्रस्तुत युद्ध विरोधी गीत से हुई। उनके भावपूर्ण गीत ने सभा में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और माहौल संवेदनशील हो उठा।
इस अवसर पर एडवोकेट नवाज़ और सभ्यसाची सेन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी और स्वतंत्रता के बिना किसी भी न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की कल्पना अधूरी है।
मार्च और सभा को सफल बनाने में ज्योति, लक्ष्मी, रघुनंदन, पवन, मधु, दीपक, त्रिभुवन, शहज़ाद, आनंद, प्रियंका, नीतीश और गोपाल सहित कई कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सभा के अंत में सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया कि समाज में शांति, समानता और इंसाफ स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास लगातार जारी रखे जाएंगे। कार्यक्रम का समापन ‘इंसाफ और इंसानियत जिंदाबाद’ के नारों के साथ हुआ।






















