समस्तीपुर/दलसिंहसराय
(राज कुमार सिंह)
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के डैनी चौक स्थित स्थानीय सेवा केन्द्र कल्याणकारी भवन में सोमवार को अलौकिक होली मिलन समारोह उत्साहपूर्वक मनाया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए समस्तीपुर से पधारे ओमप्रकाश भाई ने कहा कि होली के मौक़े पर एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाने से एक दिन पहले होलिका दहन मनाने का रिवाज़ है। इसका आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में खुशियाँ तब आएंगी जब हम परमात्म-स्मृति में स्वयं के भीतर की बुराइयों का दहन करेंगे। जब तक हम इनका दहन नहीं करते, ये विकृतियाँ हमारी खुशियों का दहन करती रहती हैं। आत्म-ज्ञान और परमात्म-ज्ञान की अनुभूति से हमारा जीवन शान्ति, प्रेम, पवित्रता, ख़ुशी, आनन्द, शक्तियों के रंग में रंग जाता है। तब हमें जो मिलता है उसे हमारे द्वारा ये सुखदायी रंगों भरी पिचकारी स्वतः सच्ची ख़ुशियों भरी शुभकामनाओं से सराबोर करती रहती है। उन्होंने सभी से ऐसी सच्ची शुभकामनाओं भरी स्वस्थ और सुखद होली खेलने का आह्वान किया। स्वयं होलिएस्ट ऑफ़ होली परमपिता परमात्मा शिव अभी हम आत्माओं को ऐसी सच्ची होली खेलना सिखा रहे हैं। इस होली का रंग जितना चढ़े, उतना अच्छा।
वंही समस्तीपुर से आए वरीय आयकर अधिवक्ता डीके सिंह ने ईश्वरीय विश्व विद्यालय में आने के उपरांत हुए प्रेरणास्पद अनुभवों से सभी को लाभान्वित किया।
सोनिका बहन ने होली के तीन अर्थों का स्मरण कराते हुए कहा- हो ली अर्थात् बीती सो बीती, होली अर्थात् पवित्र और होली अर्थात् मैं आत्मा परमात्मा की हो ली। इन तीन अर्थों में होली का सार समाहित है। उन्होंने समस्त नगरवासियों से ऐसी होली मनाने का आह्वान किया।
मौक़े पर सभी को आत्म-स्मृति का तिलक लगाया गया, सभी पर गुलाबासी एवं पुष्पवर्षा की गई। ओमप्रकाश भाई ने होली के आध्यात्मिक रहस्य से भरे सुंदर गीतों से शमां बांध दिया।
मौके पर विजय भाई, विनोद ठाकुर भाई, जयजयराम भाई, मौसम सुरेका सहित दर्जनों भाई-बहन मौजूद थे।
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