दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 24जनवरी।
स्वतंत्रता के सारथी शैलेन्द्र दीक्षित। हम सभी उन्हें भैया कहते थे।दैनिक जागरण बिहार, बंगाल और झारखंड में वे हमारे संपादक थे, उन्होंने ही स्वतंत्रता के सारथी कालम की शुरुआत की थी। तब मैं किशनगंज जिले में दैनिक जागरण अखबार का प्रभारी था। आदरणीय कमलेश त्रिपाठी भैया भागलपुर के प्रभारी संपादक हुआ करते थे। उनकी प्रेरणा से हमलोग ” जिन्होंने भारत के संविधान से प्रेम करते हुए, संविधान के दायरे में रहते हुए,संविधान के सपनों के भारत को अपने समुदाय में सृजन करने की कोशिश किया है, उनपर गणतंत्र दिवस के अवसर पर लिखा करते थे।
शैलेन्द्र भैया का आध्यात्मिक शरीर हमलोगों के बीच सदैव मूर्तिमान रहता है। उनके भौतिक शरीर के अवसान के बाद आदरणीय विमलेंदु भैया ने लिखा :
कुछ लोगों का व्यक्तित्व ही ऐसा होता है जिन्हें देखकर आप मोहित हो जाते हैं। शैलेंद्र दीक्षित सर ऐसे ही व्यक्ति थे। एडिटर तो मेरे बहुत हुए लेकिन ‘संपादक जी’ बस एक ही हुए। शैलेंद्र दीक्षित सर। इनके साथ काम करने का मौका मिला। इनसे बहुत कुछ सीखा। अपनापन बढ़ा तो जीवन से जुड़ी काफी निजी बातें शेयर करता था। सुख दु:ख की बातें होती थीं। राह बताते थे।

स्वतंत्रता के सारथी, दैनिक जागरण बिहार, बंगाल और झारखंड के संपादक रहे शैलेंद्र भैया ने शुरू करवाया था “स्वतंत्रता के सारथी कालम।” उनका आध्यात्मिक शरीर हमलोगों के समक्ष मूर्तिमान रहता है…
अभी पता चला कि आज ही अचानक विदा हो गए। कानपुर में ही। परमात्मा ने बुला लिया। सिर्फ डेढ़ साल पहले आंटी गुजर गई थीं। यहीं पारस, पटना में। और आज यह खबर। सर के माता पिता जीवित हैं। ऐसे में उन्हें अभी इस दुनिया में रहना था लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। दैनिक जागरण को उन्होंने एक अलग पहचान दी थी और कई नवांकुर और अनगढ़ को पत्रकारिता में मौका दे उन्हें वटवृक्ष बनने का मौका दिया। श्रद्धांजलि Shailendra Dixit सर। परमपिता परमेश्वर आपको मोक्ष दें। अनुपम दीक्षित Anupam Dixit भाई और सभी परिजनों के प्रति इस दुःख की घड़ी में हार्दिक संवेदना।























