नजरिया न्यूज़, अररिया।
अररिया जिले से करीब 16 साल पहले बहला-फुसलाकर ले जाए गए एक गरीब परिवार के मासूम बच्चे की घर वापसी ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। 12 साल की उम्र में लापता हुआ मुन्ना जावेद आखिरकार 16 साल बाद अपने माता-पिता से मिल सका। बेटे को सामने देखकर मां जरीना खातून और पिता मो. शमीम की आंखें नम हो गईं, वहीं गांव में भी भावुक माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, 16 साल पहले वर्ष 2009-10 के आसपास गांव करेला, बौसी थाना क्षेत्र, रानीगंज प्रखंड निवासी जावेद उर्फ फेकना नामक व्यक्ति ने मुन्ना जावेद को बेहतर काम और भविष्य का झांसा देकर घर से ले गया। उस वक्त मुन्ना की उम्र मात्र 12 वर्ष थी। आरोपी पहले उसे बनारस ले गया, जहां कालीन निर्माण उद्योग में उससे जबरन काम कराया गया। काम के दौरान मारपीट भी की जाती थी। करीब 10 दिन बाद उसे ट्रेन और फिर बस के जरिए नागालैंड भेज दिया गया।
नागालैंड पहुंचने के बाद आरोपी ने मासूम बच्चे को करीब 16 लाख रुपये में बेच दिया और फिर कंटेनर के माध्यम से बर्मा (म्यांमार) भेज दिया। वहां उससे लोहे और स्क्रैप गलाने जैसे खतरनाक काम में 16 वर्षों तक जबरन मजदूरी करवाई गई। इस दौरान वह लगातार शोषण, भय और पीड़ा के साए में जीवन जीता रहा।
इधर, बेटे के लापता होने के बाद मां जरीना खातून ने हार नहीं मानी। वर्ष 2012 में बौसी थाना में जावेद उर्फ फेकना और मुर्शिद दुखःन के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। केस दर्ज होने के बाद वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष चलता रहा। पीड़िता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में भी गुहार लगाई। अंततः न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ इश्तेहार जारी किया।
कानूनी दबाव बढ़ने पर आरोपी ने बर्मा से गुवाहाटी होते हुए मुन्ना को अररिया लाकर, जावेद उर्फ फेकना के घर के पास छोड़ दिया। सूचना मिलने पर बाल कल्याण समिति अररिया ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को संरक्षण में लिया और आवश्यक प्रक्रिया के बाद उसे उसकी मां को सौंप दिया।
16 साल बाद बेटे की सकुशल वापसी पर परिवार ने राहत की सांस ली, लेकिन इस घटना ने मानव तस्करी की भयावह सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अब पीड़ित परिवार आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।























