नजरिया न्यूज़ अररिया। सिकटी प्रखंड के एक गांव में दुष्कर्म का शिकार बनी आठ वर्षीया बच्ची तीन महीने तक मौत से लड़ने के बाद आखिरकार जिंदगी की जंग हार गयी। पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान सोमवार की रात उसकी मौत हो गयी। परिवार के अनुसार बच्ची लगातार तीन माह तक सरकारी व निजी अस्पतालों के चक्कर लगाती रही, दो बार उसका ऑपरेशन हुआ, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। परिजन इस बात से भी आहत हैं कि एक चौकीदार की बेटी होने के बावजूद वह अपने गुनहगारों को सजा दिलवाते हुए नहीं देख सकी।
घटना दो अक्तूबर की अल सुबह घटी थी, जब बच्ची अपनी मां के साथ घर में सोई थी और पिता ड्यूटी पर थे। सुबह बच्ची को खून से लथपथ देख परिजनों ने तुरंत स्थानीय थाना को सूचना दी और उसे सदर अस्पताल ले जाया गया। हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने उसे उच्च केंद्र रेफर कर दिया। तीन महीने के उपचार के बावजूद अंततः उसकी मृत्यु हो गयी।
मौत के बाद भी परिवार को पुलिस की लापरवाही का सामना करना पड़ा। पूर्णिया सदर अस्पताल ने मामले की सूचना फणीश्वरनाथ रेणु टीओपी को दी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने यह कहते हुए पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया कि मामला अररिया जिला का है। इस कारण शव कई घंटों तक अस्पताल में पड़ा रहा। बाद में अररिया महिला थाना की टीम पहुंची, जिसके बाद मेडिकल बोर्ड बनाकर पोस्टमार्टम कराया गया।
घटना के तीन महीने गुजरने के बाद भी पुलिस आरोपी तक पहुंचने में नाकाम है। बच्ची की मां द्वारा महिला थाना में अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं व पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। परिजनों का कहना है कि जांच की गति बेहद धीमी है और पुलिस गुनहगारों की पहचान तक नहीं कर सकी है।
डीएसपी मुख्यालय मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तकनीकी अनुसंधान जारी है और जल्द ही घटना का उद्भेदन कर लिया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोग और परिजन सवाल उठा रहे हैं कि तीन महीनों में भी यदि पुलिस किसी सुराग तक नहीं पहुंच पायी तो न्याय कब मिलेगा।
मासूम की मौत ने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है। यह घटना न सिर्फ दरिंदगी की पराकाष्ठा दिखाती है, बल्कि पुलिस और प्रशासन की संवेदनहीनता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।





















