नजरिया न्यूज़, बारसोई (कटिहार)।
सुशासन सप्ताह के तहत प्रशासन चला गांव की ओर अभियान के अंतर्गत पंचायतों में लगाए जा रहे शिविरों की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। अधिकांश पंचायतों में यह शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। जहां पुरे शिविर का भार एकमात्र पंचायत सचिव के पल्ले आन पड़ा है। उसी सबकुछ करना होता है।
मंगलवार को लहरिया पंचायत में आयोजित शिविर इसका प्रत्यक्ष उदाहरण रहा। दिन के करीब साढ़े 12 बजे, जब धूप खिलकर निकल चुकी थी, शिविर स्थल पर एक दर्जन लोग भी मौजूद नहीं थे। मौके पर पंचायत सचिव, पंचायत के एक आईटी सहायक, एक-दो कर्मी तथा पंचायत के मुखिया गोपाल राय उपस्थित थे। विभागीय पदाधिकारियों की अनुपस्थिति साफ नजर आई।
इस संबंध में पंचायत सचिव राघवेंद्र कुमार ने बताया कि सुबह लोग आए थे और अपना-अपना हस्ताक्षर बनाकर चले गए। उन्होंने कहा कि शिविर का समय अभी समाप्त नहीं हुआ है, परन्तु विभिन्न विभागों के कर्मी अलग अलग कामों के कारण लौट गए। हल्का कर्मचारी के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वे दूसरे पंचायत में जमीन मापी कार्य में व्यस्त होने के कारण केवल हाजिरी बनाकर चले गए। इसी तरह पशुपालन विभाग, स्वास्थ्य विभाग के एक सीएचओ सहित अन्य विभागों के कुछ कर्मी भी केवल हस्ताक्षर बनाकर थोड़ी देर बैठने के बाद निकल गए।
शिविर में बिजली विभाग, आपूर्ति विभाग तथा पीएचईडी विभाग पुलिस विभाग का कोई भी कर्मी या पदाधिकारी उपस्थित नहीं हुआ। पूरे शिविर के दौरान एकमात्र पंचायत सचिव ही लगातार मौजूद रहे और आवेदनों का संकलन करते नजर आए। पंचायत सचिव के अनुसार शिविर में कुल लगभग तीन दर्जन आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि उन आवेदनों में नए और पुराने दोनों प्रकार के आवेदन शामिल हैं। वहीं
प्राप्त आवेदनों में कबीर अंत्येष्टि योजना के 5, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के 10, वंशावली के 2, आय प्रमाण पत्र के 2, निवास प्रमाण पत्र के 5, लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 3, वृद्धावस्था पेंशन के 5, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के 2 तथा बिहार निशक्तता पेंशन योजना का 1 आवेदन शामिल है।
गौरतलब है कि 10 हजार से अधिक आबादी वाली पंचायत में सुशासन सप्ताह के शिविर में मेले जैसा दृश्य होना था वहां एक दर्जन लोग भी दोपहर को नजर नहीं आए।























