= कबूतरबाजी के माध्यम से संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के पते पर संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पंजीकरण को ठहराया गया सोसाइटी ऐक्ट 1860के अनुसार सही
= माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की बेंच ने 2013में कानून के अनुसार संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का नवीनीकरण करने का सुनाया था फैंसला
= त्वरित टिप्पणी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सितंबर 2025 को सोसाइटी ऐक्ट 1860 में संशोधन करने का लिया है निर्णय
= पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में डिप्टी रजिस्ट्रारों और रजिस्ट्रारों के मनमानी फैसलों को नहीं लिया गया था संज्ञान
= डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी योगेश त्रिपाठी ने अपने सगे चचेरे भाई को संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का प्रबंधक बनाने के लिए संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर के पते पर संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का कराया 2001के दशक में बैकडेट में पंजीकरण: पड़ताल
मनोज सिंह और अनिल उपाध्याय संवाददाता नजरिया न्यूज शाहगंज/वाराणसी ’22दिसंबर 2025।
पार्ट-4 : 2006, 2014 और 2025 में घास और घोड़े दोनों स्वतंत्र थे। घास को शक्ति के अनुसार बढ़ने और घोड़ों को घास को पेटभर चरने और रौंदने की शक्ति प्राप्त थी। इसका उदाहरण 2014में डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी द्वारा पारित एक फैंसला है। वर्ष 2025 में डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी योगेश त्रिपाठी ने सेवानिवृत्त होने से पहले अपने सगे चचेरे भाई सुभाष त्रिपाठी को संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का प्रबंधक बनाए रखने के लिए 1932 से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी संबंद्ध संस्था संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर की पत्रावली को अस्तित्वविहीन संस्था संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर की पत्रावली में मर्ज कर दिया। यह कार्य अवैधानिक था। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार को भी सोसाइटी ऐक्ट 1832में संसोधन करना पड़ता। लेकिन डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी योगेश त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश सरकार के शासन को ताक पर रखकर 1932 और अस्तित्व विहीन संस्था की पंजीकृत फाइल को मर्ज करने का काम किया।
इसकी पुष्टि होने के बाद 20दिसंबर 2025को डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी के अवैधानिक कार्य के विरोध में संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के प्रबंधक ब्रह्मजीत सिंह और असंतुष्ट लोगों ने संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का औचक निरीक्षण किया। मौके पर सहायक प्राचार्य संस्कृत कालेज पट्टी नरेन्द्र जौनपुर अनुपस्थित थे। सभी लोगों ने ज्ञापन के माध्यम से यह संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा कुलपति संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी को देने का निर्णय लिया। संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्र जौनपुर के गेट पर प्रबंध तंत्र की भी तरफ से कबूतरबाज डिप्टी रजिस्ट्रार योगेश त्रिपाठी के विरोध में गेट पर ताला भी जड़ दिया।
गौरतलब है कि माननीय हाईकोर्ट इलाहाबाद ने कानून के अनुसार संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर नवीनीकरण करने का आदेश 2013में पारित किया था।
कानून के आलोक में 2014में डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह ने फैंसला सुनाया है कि संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। इससे पहले डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी सुभाष सिंह ने नवीनीकरण करने के लिए नवीनीकरण शुल्क जमा करने का निर्देश दिया था जिस पर उनका तबादला सपा सरकार के रजिस्ट्रार ने कर दिया था। रजिस्ट्रार 2006 सरजू प्रसाद के कार्यकाल में बैंक डेट में संस्कृत कालेजों पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के पते पर कानून को ताक पर रखकर संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पंजीकरण किया गया था। डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह ने अपने फैंसले में लिखा है” संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पंजीकरण कैसै किया गया, इस संबंध में कोई भी पत्रावली कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। फिर भी भी डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी ने संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का नवीनीकरण नहीं किया।
डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह ने 2014 के फैंसले में यह भी लिखा है:
सोसाइटी ऐक्ट 1860 में शासन ने 1975में संसोधन किया है- दो वर्ष और पांच वर्ष में संस्थाओं को नवीनीकरण कराना पड़ेगा । संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर ने नवीनीकरण 1977 में दो वर्ष के लिए कराया गया। इसके बाद 2010में नवीनीकरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया।इसलिए संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर अपंजीकृत संस्था हो गई ।
वर्ष 1982में संस्कृत महाविद्यालय महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पंजीकरण वाराणसी कार्यालय द्वारा किया गया लेकिन इस संबंध में कोई साक्ष्य संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर की पत्रावली में उपलब्ध नहीं है।
डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह ने आगे लिखा है:
संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का समय समय पर नवीनीकरण कराया जा रहा है।

20दिसंबर 2025को संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर की पत्रावली संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर की पत्रावली में मर्ज कर देने के विरोध में संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के मुख्य गेट पर जारी बैठक
कंट्राडिक्शन:
संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर 1984 में अपंजीकृत हो हुई तो 1982 में ही संस्कृत महाविद्यालय जौनपुर का संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के पते पर पंजीकरण क्यों किया गया। इस आधार पर डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह को संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का नवीनीकरण करना चाहिए था। संस्कृत महाविद्यालय पट्टी पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पंजीकरण रद कर देना चाहिए था। डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज ने अपने 2014 के फैंसले में ऐसा नहीं किया है।
फिलहाल ,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1सितंबर 2025 को सोसाइटी एक्ट में संशोधन के लिए ड्राफ्ट तैयार करने का निर्देश पदाधिकारियों को दिया है। भ्रष्ट डिप्टी रजिस्ट्रारों और रजिस्ट्रारों से पीड़ित लोग सोसाइटी ऐक्ट में संशोधन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कार्यकाल 2014 में रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार मनमानी निर्णय लेते थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उस पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में लगभग 8लाख पंजीकृत संस्थाएं हैं संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर जैसी कबूतरबाज संस्थाएं भी शामिल हैं। नये कानून में पंजीकृत या अपंजीकृत हो चुकी संस्थाओं तथा उनके स्वामित्व पर अधिकार को लेकर स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए।
कानून में जंगल राज का जंगल राज जैसे कानून दुष्परिणाम 1932से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्था संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर जैसी संस्थाओं के प्रबंध तंत्र भुगत रहे हैं।
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में विराहत जुड़ी संस्थाओं को प्रदान की जा रही सुविधाओं से भी कबूतरबाजी के चलते वंचित होना पड़ रहा है।























