नजरिया न्यूज़, बारसोई (कटिहार)। राजकुमार साह।
सुशासन सप्ताह के अंतर्गत चलाए जा रहे “प्रशासन गांव की ओर” अभियान के तहत 19 दिसंबर से 25 दिसंबर तक विभिन्न पंचायतों में सुशासन शिविर आयोजित किए जाने हैं। इन शिविरों का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना है।
परन्तु अभियान की शुरुआत ही निराशाजनक रही। पहले दिन जहां केवल पत्र जारी करने और उसके वितरण में समय निकल गया, वहीं दूसरे दिन 20 दिसंबर को लगाए गए शिविर प्रचार-प्रसार के अभाव में पूरी तरह विफल साबित हुए। कई पंचायतों में शिविर तो लगाए गए, परन्तु अधिकांश विभागों के पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित नहीं हुए। प्रशासन की ओर से केवल पंचायत सचिव, स्वच्छता ग्राही और विकास मित्र जैसे दो-तीन कर्मी ही पहुंचे, जबकि अन्य विभागों के अधिकारी नदारद रहे।
हालात ऐसे रहे कि हल्का कर्मचारी तक शिविर में नहीं पहुंचे। बेलवा पंचायत में मोहम्मद शमशाद नामक व्यक्ति हल्का कर्मचारी से हस्ताक्षर करवाने के लिए शिविर पहुंचे थे, परन्तु अधिकारी और हल्का कर्मचारी की अनुपस्थिति के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। वहीं, बेलवा पंचायत सरकार भवन में स्थित आरटीपीएस कार्यालय भी बंद मिला और शिविर के दिन कार्यालय में ताला लटका रहा।
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी चंदन प्रसाद ने बताया कि शिविर का यह प्रारंभिक दिन था और पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं हो पाने के कारण लोगों की भागीदारी कम रही। उन्होंने बताया कि 20 दिसंबर से 25 दिसंबर तक प्रतिदिन दो-दो पंचायतों में सुशासन शिविर लगाए जाएंगे। राज्य सरकार और जिला प्रशासन के निर्देश के अनुसार सभी विभागों के पदाधिकारी और कर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है तथा इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है।
उन्होंने जानकारी दी कि 22 दिसंबर को चौंदी और एकसल्ला, 23 दिसंबर को लहगरिया एवं बेलवाडांगी, 24 दिसंबर को बलतर और चांदपाड़ा तथा 25 दिसंबर को बिघोर हाट एवं शिकारपुर पंचायत में शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविर के मुख्य आयोजक संबंधित पंचायत के पंचायत सचिव होंगे और संपूर्ण व्यवस्था की जिम्मेदारी उन्हीं के पास रहेगी।
वहीं, 30 पंचायतों में से केवल 10 पंचायतों में ही शिविर लगाए जाने की सूचना मिलने पर शेष पंचायतों के लोगों में काफी निराशा देखी जा रही है।
प्रशासन के अनुसार सुशासन शिविरों में अंचलाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, थाना अध्यक्ष, मनरेगा, आपूर्ति, कल्याण, बाल विकास परियोजना, शिक्षा, कृषि, श्रम प्रवर्तन, प्रखंड अभियंता, पंचायती राज, सहकारिता और आरटीपीएस सहित सभी संबंधित विभागों के पदाधिकारियों एवं कर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है, ताकि आम जनता की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जा सके।























