- बच्चों का भविष्य नदी में बहता, प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाई चिंता
- पुल निर्माण की मांग करती छात्रा
नजरिया न्यूज़, भरगामा। जितेन्द्र कुमार जीतू।
भरगामा प्रखंड के सिरसिया–हनुमानगंज पंचायत के लोगों के लिए विकास का सपना आज भी अधूरा है। बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी ने यहां के लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है, लेकिन सबसे गहरी चोट शिक्षा पर पड़ रही है। पंचायत के वार्ड संख्या 1 और 2 के बीच बहने वाली बिलेनिया नदी सैकड़ों स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर ताला लगाने के कगार पर है। नदी के पश्चिमी हिस्से में बसे बच्चों को हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है।
बावजूद इसके, वर्षों से ग्रामीणों के अनुरोध, ज्ञापन और पंचायत बैठकों में उठी आवाजें प्रशासनिक फाइलों में दबकर रह गई हैं। न जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया और न ही विभागीय अधिकारियों ने इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाया।
नदी पार कर स्कूल जाते मासूम, हर कदम खतरे से भरा
प्राथमिक विद्यालय भवानीपुर बैरियाही टोला नदी के पूर्वी किनारे पर है, जबकि पश्चिमी इलाके में बड़ी आबादी निवास करती है। बच्चों के पास न तो नाव की सुविधा है और न ही किसी पुल का विकल्प। बरसात के दिनों में नदी उफान पर रहती है, जहां पैर फिसलते ही बड़ा हादसा हो सकता है।
फ़ोटो : नदी पार कर विद्यालय जाते छात्र
जो छात्र पढ़ाई नहीं छोड़ना चाहते, वे लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित जर्जर पुल के रास्ते स्कूल पहुंचते हैं। सुबह-सुबह अंधेरे और कीचड़ भरे रास्ते से होकर जाना इनके लिए रोज की चुनौती है। अभिभावक चिंतित हैं। उनका कहना है बच्चे घर से निकलते हैं तो दिल दहशत में रहता है। पता नहीं कब कौन-सी घटना हो जाए।
5 हजार की आबादी, फिर भी एक पुल नसीब नहीं
प्रखंड मुख्यालय से महज 12 किमी और जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर यह क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि नदी पर पुल नहीं होने से बच्चों की शिक्षा,मरीजों का अस्पताल पहुंचना,कृषि कार्य,बाजार जाना
पंचायत एवं प्रखंड कार्यालय से संपर्क सब कुछ प्रभावित रहता है। नदी के पार उतरना लोगों की मजबूरी है, लेकिन मूलभूत सुविधा की अनदेखी लगातार नाराजगी बढ़ा रही है।
स्थानीय ग्रामीण नंदलाल शर्मा, मोहन शर्मा, बलदेव शर्मा, भुनेश्वर चौपाल, संदीप चौपाल, रमेश शर्मा, सूरज कुमार सहित कई लोगों ने बताया कि पुल निर्माण की मांग दशकों पुरानी है। नदी से जूझ रहे लोगों का धैर्य अब टूटने लगा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द ही प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की तो वे सड़क से शासन तक आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।























