नज़रिया न्यूज़, रानीगंज।
समाचार प्रतिनिधि : आदित्य दत्ता। रानीगंज थाना क्षेत्र के छोटे से गाँव में एक दर्दनाक मौत ने पूरे रानीगंज थाने के हंगामे को जन्म दे दिया है। हांसा पंचायत की रहने वाली अंजली कुमारी ने आरोप लगाया है कि उनके ससुर-दादी (दिलीप गोस्वामी व बेबी देवी) को जानबूझकर झूठे बयानों व साजिश के तहत फँसाया जा रहा है। मामला दर्ज है — कांड संख्या 425/25, लेकिन पीड़ित परिवार इसका नाम आते ही ‘साज़िश’ बता रहा है और एसपी अररिया से त्वरित व निष्पक्ष जांच की गुहार लगा चुका है।
क्या हुआ — घटनाक्रम एक लाइन में
परिवार का कहना है कि 11 नवंबर 2025 की रात विशाल ठाकुर अपनी गर्भवती पत्नी पूजा देवी को इलाज के लिए गीदवास बाजार स्थित मामी के घर ले गए। 12 नवंबर 2025 की सुबह करीब 04:00 बजे प्रसव हुआ — परन्तु प्रसव के दौरान कथित लापरवाही के कारण नवजात 15 मिनट के भीतर ही मौत हो गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि बिना सूचना दिये ही बच्चा व उसकी माँ को पास ही दफन कर दिया गया — और तब से मामला गरमाया हुआ है।
परिवार का बड़ा आरोप: शव को गड्ढा से निकालकर झूठा मुक़दमा
अंजली कुमारी ने दावे किए हैं कि कुछ प्रभावित स्थानीय लोगों — जिनमें परिवार ने नाम भी बताए हैं — ने आर्थिक लालच और दबाव बनाकर नवजात के शव को फिर से खोदवाकर बाहर निकाला। पीड़ित परिवार के अनुसार पवन गोस्वामी (एससी/एसटी कांड संख्या 11/25 का आरोपी) अपनी नई स्कॉर्पियो से आया और दबाव बनाकर घटनास्थल को ऐसे मोड़ दे दिया गया कि उनके ससुर–सास को जबरन मामलों में जोड़ दिया गया।
परिवार ने जिन लोगों का नाम लिखा है — पवन गोस्वामी, नेपालू गोस्वामी, तपेश गोस्वामी, रॉकी गोस्वामी, ललन गोस्वामी, विपुल गोस्वामी, चंदन ठाकुर, कृष्ण मोहन ठाकुर — उनका आरोप है कि ये लोग मिलकर मामले को भटका रहे हैं और पुराने रंजिश के चलते झूठे मुक़दमों के ज़रिये परिवार को फँसाने की कोशिश कर रहे हैं।
परिवार ने पेश किए ‘ठोस सबूत’ — अस्पताल रिकार्ड, आशा कार्यकर्ता उपस्थिति और मोबाइल लोकेशन
पीड़ित पक्ष ने कहा कि घटना के समय उनके ससुर–सास अररिया सदर अस्पताल में मौजूद थे — सास बेबी देवी आशा कार्यकर्ता हैं और प्रसव कार्य में तैनात थीं। परिवार ने बताया कि अस्पताल में भर्ती दस्तावेज, आशा कार्यकर्ता की उपस्थिति प्रमाण पत्र और मोबाइल लोकेशन के रिकॉर्ड साफ़-साफ़ ये दिखाते हैं कि उनके परिजन घटना स्थल पर नहीं थे। इन दस्तावेज़ों को उन्होंने एसपी अररिया के समक्ष भी रखा है और निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि झूठे काण्ड से उन्हें राहत मिल सके।
हमारे ससुर-दादी अस्पताल में थे — सब रेकॉर्ड्स हैं। फिर उन्हें कैसे घटना में जोड़ा जा सकता है? यह पूरी तरह साजिश लगती है,” — अंजली कुमारी ने स्थानीय पत्रकारों से कहा।
क्या कहता है गांव — प्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल
गांव के कुछ प्रतिनिधियों ने भी स्वीकार किया कि स्थानीय स्तर पर कुछ लोग मिलकर मामला भटका रहे हैं और केस को ऐसी दिशा दे रहे हैं जिससे पीड़ित परिवार दबाव में आ जाए। प्रतिनिधियों ने जांच की माँग करते हुए कहा कि जिन-लोगों के नाम सामने आए हैं, उन पर भी सख़्ती से छानबीन होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।
पुलिस की भूमिका — आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं मिली
इस रिपोर्ट के समय तक एसपी अररिया की ओर से कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है। पीड़ित परिवार ने एसपी से मामले की निष्पक्ष तहकीकात व त्वरित कार्रवाई की मांग की है ताकि सच बाहर आ सके और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।नवजात की दर्दनाक मौत ने गाँव में भावनात्मक उथल-पुथल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां परिवार सबूत देकर अपने ससुर-सास की बेगुनाही साबित करने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आरोपितों के खिलाफ चल रही स्थानीय अटकलें और पुरानी रंजिश ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। पीड़ित परिवार अब न्याय की आस में एसपी अररिया के दरवाजे खटखटा रहा है — और गांव वाले चाहते हैं कि निष्पक्ष और तेज़ जांच हो ताकि सच सबके सामने आ सके और बेनाम आरोपों का पर्दाफाश हो।























