बारसोई (कटिहार)।
बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव परिणामों की हलचल अभी थमी नहीं है। गलियों से लेकर चाय की दुकानों तक हर जगह हार-जीत की चर्चा है—कौन कितने मतों से जीता, किसका कितना प्रभाव रहा, किस प्रत्याशी को उम्मीद से कम वोट मिले और कौन अप्रत्याशित रूप से आगे निकल गया। इन्हीं चर्चाओं के बीच एक बात साफ़ सामने आ रही है—संगीता देवी का भाग्य इस वार उनके साथ मज़बूती से खड़ा था।जानकारी के अनुसार संगीता देवी का चुनाव चिन्ह हेलिकॉप्टर था, जबकि एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी वरुण झा का प्रतीक पानी का जहाज़ था। गाँवों और टोले-मोहल्लों में बुज़ुर्गों तथा अशिक्षित मतदाताओं को ‘हेलिकॉप्टर’ समझाना कार्यकर्ताओं के लिए चुनौती बन गया।
कई जगह कार्यकर्ताओं ने प्रतीक को ‘जहाज़’ बताकर समझाने की कोशिश की, जिससे भ्रम की स्थिति भी बनी। पानी का जहाज़ और आसमान का जहाज़ अलग होने के बावजूद प्रतीक में समानता का फायदा वरुण झा को मिला और उन्हें 5000 से अधिक वोट मिल गए।इतना ही नहीं, मतदान के दौरान दो ईवीएम टेबल पर रखे गए थे। दोनों मशीनों में तीसरे क्रमांक पर अलग-अलग चीज़ें थीं—पहली ईवीएम में संगीता देवी का हेलिकॉप्टर, जबकि दूसरी में तीसरे नंबर पर था नोटा। ‘तीसरे नंबर’ की इस समानता ने कई मतदाताओं को उलझा दिया, जिसका नतीजा यह रहा कि नोटा को भी 3000 से अधिक मत प्राप्त हुए। इन तमाम नकारात्मक परिस्थितियों—प्रतीक को लेकर भ्रम, बूथों पर मतदाताओं की उलझन, नोटा की बढ़ी संख्या और प्रतिद्वंद्वी के प्रतीक से उत्पन्न समानता—के बावजूद संगीता देवी का भाग्य और जनता का भरोसा उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा। परिणामस्वरूप उन्होंने सभी बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए 351 मतों के मामूली अंतर से महत्वपूर्ण जीत दर्ज कर ली।























