राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में पिछले कुछ दिनों से चल रही अंदरूनी खटपट एक बार फिर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। चर्चाओं की वजह हैं—तेजस्वी यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले संजय यादव। बीते एक सप्ताह में सोशल मीडिया की हलचल ने संकेत दिए कि लालू परिवार के भीतर संजय यादव को लेकर असहमति गहराती जा रही है।
18 सितंबर को लालू यादव की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने फेसबुक पर RJD समर्थक आलोक कुमार की एक पोस्ट शेयर की। पोस्ट में लिखा था कि “पूरे बिहार के साथ हम सभी लालू जी और तेजस्वी को ही फ्रंट सीट पर देखने के अभ्यस्त हैं, उनकी जगह कोई और बैठे यह मंजूर नहीं।” इसके साथ संजय यादव की वह फोटो लगी थी जिसमें वे बिहार अधिकार यात्रा की बस की फ्रंट सीट पर बैठे दिख रहे थे। रोहिणी ने पोस्ट पर कुछ नहीं लिखा, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह संकेत माना गया कि उनका इशारा संजय यादव पर है।
19 सितंबर को रोहिणी ने अपने X हैंडल से पार्टी सहित लालू-राबड़ी और परिवार के सभी सदस्यों को अनफॉलो कर दिया। इससे परिवार में दरार की खबरों को और बल मिला। कहा जा रहा है कि तेजस्वी यादव को पूर्ण स्वतंत्रता मिलने के बाद उनके विश्वस्त संजय यादव की भूमिका और प्रभाव काफी बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेजस्वी की रणनीति, बैठकें और राजनीतिक फैसलों में संजय की भूमिका प्रमुख मानी जाती है। यही बढ़ता प्रभाव लालू परिवार के कुछ सदस्यों को असहज कर रहा है।
तेज प्रताप यादव पहले भी कई बार संजय को निशाने पर ले चुके हैं। वे उन्हें ‘जयचंद’ कहकर अप्रत्यक्ष रूप से हमला बोलते रहे हैं। अगस्त 2021 में उन्होंने यह आरोप लगाया था कि तेजस्वी से मुलाकात रोकने का काम संजय यादव ने किया। अक्टूबर 2021 के उपचुनाव में भी तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर संजय को लेकर तंज कसा था।
सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर संजय यादव कौन हैं और कैसे वे तेजस्वी के इतने करीब आ गए? संजय हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नंगल सिरोही गांव के रहने वाले हैं। कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट संजय की 2.18 करोड़ की संपत्ति है। दोनों की पहली मुलाकात 2012 में दिल्ली के क्रिकेट मैदान पर हुई थी। 2013 में जब लालू यादव चारा घोटाले में जेल गए, तब तेजस्वी राजनीति समझने पटना लौटे और संजय को भी अपने साथ बुला लिया। संजय ने मल्टीनेशनल IT कंपनी की नौकरी छोड़कर तेजस्वी का साथ संभाल लिया।
आज संजय यादव RJD में तेजस्वी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाते हैं, और यही बढ़ता दखल लालू परिवार के भीतर राजनीतिक गर्माहट का कारण बना हुआ है।























